असीम आस्था और विश्वास का प्रतीक है मुंबई स्थित महालक्ष्मी मंदिर, ऐसे हुई थी स्थापना !


असीम आस्था और विश्वास का प्रतीक है मुंबई स्थित महालक्ष्मी मंदिर, ऐसे हुई थी स्थापना !
                      6 सितंबर को महालक्ष्मी व्रत रखा जाना है, इस दिन विशेष रूप से लक्ष्मी माता के महालक्ष्मी स्वरुप की पूजा की जाती है। इस दिन देशभर के महालक्ष्मी मंदिरों में भक्तों की अपार भीड़ देखी जा सकती है। महालक्ष्मी माता का सबसे प्रसिद्ध मंदिर मुंबई स्थित महालक्ष्मी मंदिर है जिसे असीम आस्था और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। आज हम आपको खासतौर से मुंबई स्थित महालक्ष्मी मंदिर के रोचक तथ्यों के बारे में बताने जा रहे हैं। यहाँ जानिए क्यों आस्था का केंद्र माना जाता है इस मंदिर को और कैसे हुआ था इसका निर्माण।

काफी पुराना है मुंबई स्थित महालक्ष्मी मंदिर
                      आपको बता दें की मुंबई स्थित महालक्ष्मी मंदिर मुंबई के ही नहीं बल्कि देश के प्राचीनतम धार्मिक स्थलों में से एक है। मुंबई में समुद्र किनारे बहुलाभाई देसाई मार्ग पर स्थित महालक्ष्मी मंदिर अपनी सौंदर्य और आस्था के लिए लाखों लोगों के बीच आकर्षण का एक प्रमुख केंद्र है। हिन्दू धर्म में लक्ष्मी माता को धन की देवी कहा जाता है। जीवन में सुख समृद्धि और ऐश्ववर्य के लिए लक्ष्मी माता की पूजा अर्चना को विशेष महत्व दिया जाता है। लक्ष्मी माता की पूजा अर्चना के लिए खासतौर से शुक्रवार का दिन विशेष माना जाता है। इसलिए महालक्ष्मी मंदिर में भी इस दिन भक्तों की हज़ारों लाखों की संख्या में भीड़ देखी जा सकती है।

आकर्षक सजावट के लिए भी मशहूर है महालक्ष्मी मंदिर
                      महालक्ष्मी मंदिर में देवी के दर्शन के लिए आने वाले भक्त विशेष रूप से इस मंदिर की सुन्दर सजावट और सौंदर्य के भी दीवाने हो जाते हैं। बता दें कि मंदिर में प्रवेश करते ही सबसे पहले आपको मुख्य द्वार पर बेहद ख़ूबसूरत नक्काशी का काम देखने को मिलता है। यहाँ महालक्ष्मी जी की सुंदर और आभूषणों से सुसज्जित मूर्ति के साथ ही मंदिर परिसर में अन्य देवी देवताओं की सुंदर मूर्तियां भी स्थापित है। महालक्ष्मी माता के साथ ही मुख्य गर्भगृह में महाकाली और माता महासरस्वती की विभिन्न आभूषणों से सुसज्जित मूर्ति स्थापित की गयी है।

रोचक है इस मंदिर के स्थापना की कहानी
                      बता दें कि इस मंदिर की स्थापना की कहानी बेहद रोचक है। ऐसा माना जाता है कि माता लक्ष्मी ने खुद सपने में आकर समुद्र किनारे इस मंदिर की स्थापना का आदेश दिया था। इस मंदिर की स्थापना से जुड़ी कहानी के अनुसार जब अंग्रेजों ने मुंबई के वर्ली और ब्रीच कैंडी के बीच एक सड़क मार्ग के निर्माण का काम शुरू किया तो एक दिन अचानक काफी तेज समुद्री तूफ़ान उठा और निर्माण कार्य रुक गया। माना जाता है कि इस सड़क निर्माण के प्रोजेक्ट में एक रामजी नाम के भारतीय इंजीनियर थे जिनके सपने में आकर लक्ष्मी माता ने खुद उन्हें समुद्र से तीन मूर्तियां निकालकर उस जगह उनकी मंदिर स्थापित करने का आदेश दिया था। कहा जाता है कि जब तक तीनों मूर्तियों की स्थापना नहीं की गयी तब तक ब्रीच कैंडी मार्ग का काम पुनः शुरू नहीं हो पाया था।

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