खजराना गणेश मंदिर - यहाँ गणेश जी की पीठ पर बनाया जाता है उल्टा स्वास्तिक, बुधवार के दिन होती है विशेष पूजा !


यहाँ गणेश जी की पीठ पर बनाया जाता है उल्टा स्वास्तिक, बुधवार के दिन होती है विशेष पूजा !
                       आने वाले 2 सितंबर को देश भर में गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाएगा। हिन्दू धार्मिक मान्यता के अनुसार गणेश चतुर्थी के पर्व को गणेश जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। दस दिनों तक चलने वाले इस त्यौहार के दौरान जगह-जगह पर पंडाल बनाकर गणेश जी की पूजा अर्चना की जाती है। इसके साथ ही साथ बुधवार के दिन को गणेश पूजा के लिए अहम माना जाता है। आज हम आपको एक ऐसे गणेश मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जहाँ गणेश जी की पीठ पर स्वास्तिक का उल्टा निशान बनाया जाता है और बुधवार के दिन विशेष पूजा अर्चना की जाती है। जैसा की आप सभी जानते हैं कि स्वास्तिक के चिन्ह को खासतौर से शुभ का प्रतीक माना जाता है, लेकिन यहाँ इसे उल्टा बनाये जाने के पीछे ख़ास महत्व है। आइये विस्तार से जानते हैं इस मंदिर के बारे में।

खजराना गणेश मंदिर में बनाया जाता है उल्टा स्वास्तिक का निशान
                        आपको बता दें कि मध्य प्रदेश के इंदौर में खजराना गणेश मंदिर में मुख्य रूप से गणेश जी की पीठ पर उल्टा स्वास्तिक का निशान बनाने की परंपरा है। इस मंदिर के बारे में ये कहा जाता है कि यहाँ आने वाले सभी श्रद्धालुओं की मनोकामना जरूर पूरी होती है। इस मंदिर को गणेश जी के सबसे महत्वपूर्ण और सिद्ध मंदिरों में से एक माना जाता है। गणेश जी के इस मंदिर को महारानी अहिल्याबाई ने 1735 में बनवाया था। यहाँ गणेश जी की पूजा अर्चना के लिए आने वाले भक्त सबसे पहले मंदिर की तीन परिक्रमा लगाते हैं और धागा बांधते हैं। इसके साथ ही गणेश जी की पूजा के बाद उनकी प्रतिमा के पीठ पर स्वास्तिक का निशान बनाया जाता है। गणेश जी के इस मंदिर को ख़ासा चमत्कारी माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इंदौर के एक पंडित को मंदिर में स्थापित गणेश जी की प्रतिमा का सपना आया था। इसके बाद महारानी अहिल्या ने पंडित के सपने के मुताबिक उस जगह की खुदाई करवाई और वहां से गणेश जी की प्रतिमा बाहर निकलवाकर उसे स्थापित करवाया और भव्य मंदिर का निर्माण करवाया। गणेश जी की मूर्ती को जिस जगह से निकलवाया गया था उस जगह पर एक जलकुंड है, जो आज भी मंदिर के सामने स्थित है।

बुधवार के दिन होती है विशेष पूजा अर्चना
                    यूँ तो इस ऐतिहासिक मंदिर में हर दिन ही पूजा की जाती है लेकिन बुधवार के दिन खासतौर से यहाँ विशेष पूजा अर्चना और आरती की जाती है। इस दिन यहाँ आने वाले भक्तों की संख्या दोगुनी हो जाती है। खजराना गणेश मंदिर में बुधवार के दिन भक्तों का हजूम उमड़ पड़ता है। इसके साथ ही गणेश चतुर्थी के दिन भी इस मंदिर की रौनक देखते ही बनती है। पूजा पाठ और आरती के साथ ही गणेश मंत्रों का उच्चारण वातावरण को रमणीय बना देता है। हज़ारों लाखों की संख्या में भक्त यहाँ गणेश जी के दर्शन के लिए एकत्रित होते हैं। बुधवार के दिन शाम के वक़्त होने वाली आरती को ख़ासा महत्वपूर्ण माना जाता है।
                  इस मंदिर की ख़ासियत ये है कि यहाँ गणेश जी की बड़ी मूर्ती के साथ ही आस-पास अन्य देवी देवताओं की मूर्ती भी स्थापित की गयी है। खजराना गणेश मंदिर की गिनती देश के सबसे धनी मंदिर के रूप में भी की जाती है। यहाँ आने वाले भक्त चढ़ावे के रूप में इतना नगदी और सोना  चांदी चढ़ाते हैं, जिसने इस मंदिर को देश के अन्य मंदिरों के मुकाबले काफी समृद्ध बना दिया है। इस गणेश मंदिर में चढ़ावे के लिए ऑनलाइन सेवाओं का भी उपयोग किया जाता है।

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