इन जगहों पर लगते हैं सावन के बड़े मेले, उमड़ आता है जन सैलाब


इन जगहों पर लगते हैं सावन के बड़े मेले, उमड़ आता है जन सैलाब
                  जैसा सभी जानते है कि इस वर्ष के सावन के महीने का आरंभ 17 जुलाई से हो चुका है। जो कि पूरे एक 1 पूरे माह के साथ 15 अगस्त को पूर्णिमा के दिन खत्म होगा। सावन का ये विशेष महीना शिव भक्तों के लिए बेहद खास माना जाता है। इसी महत्ता को देखते और समझते हुए सावन मास में भगवान भोलेनाथ के दर्शन के उनके भक्त दुनिया भर के कोनों से दूर-दूर से आते हैं। भक्तों के लिए सावन का महीना ही अन्य दिनों के मुकाबले भगवान भोलेनाथ को खुश करने के लिए सबसे शुभ सिद्ध होता है। सावन मास की महत्वता को देखते हुए ऐसी पुराणिक मान्यताएं हैं कि भगवान विष्णु के देवशयनी एकादशी पर अपने शयन कक्ष में सो जाने के बाद इस मास में भोलेनाथ शिव खुद अपने ऊपर तीनों लोकों की रक्षा का दायित्व उठा लेते हैं।
                  हिन्दू धर्म अनुसार श्रावण मास में भक्तों से भगवान शिव और माता पार्वती संयुक्त रूप से प्रसन्न होकर उन्हें मनोवांछित फल प्राप्ति का आशीष देते हैं। इस महीने किये जाने वाले दान-पुण्य, व्रत और भगवान शिव की आराधना करने से सुख, सफलता, सादगी, संयम, सच्चरित्रता, स्नेह और सौभाग्य का वरदान मिलता है। भगवान शिव हर विपरीत परिस्थिति में भक्त का सहारा बनते हैं। इस माह पूजा-अर्चना करने से भक्तों के जीवन में तरक्की के रास्ते खुलते हैं और भगवान शिव की पूर्णत: कृपा मिलती है। इसी कारण आज हम आपको बताने वाले हैं भगवान शिव के उन कुछ पवित्र धामों के बारे में जहां पर हर सावन भव्य मेलों का आयोजन किया जाता है, जिसका आनंद लेने भोले के भक्त दूर-दूर से आते है:-

झारखंड के देवघर का भव्य श्रावणी मेला
                  हर साल सावन के महीने में झारखंड के देवघर जिला स्थित विश्व प्रसिद्ध वैद्यनाथ धाम में बिहार के सुल्तानगंज में गंगा नदी से करोड़ों कांवड़िये जल लेकर स्थानीय मंदिर में स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंग में से एक का जलाभिषेक करते हैं। ये आयोजन बेहद भव्य होता है जिस कारण यहाँ भव्य मेला आयोजित किया जाता है। इस मेले को देवघर का सावन मेला कहा जाता है जो भगवान शिव के सबसे बड़े मेलों में शुमार है।
लखीमपुर का भव्य सावन मेला
                  हर साल देखने को मिलता है कि भगवान भोले का प्रिय सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही भोले के भक्त पूरी भक्ति-श्रद्धा के साथ महादेव का गुणगान करते हैं। इसी महत्व के चलते छोटी काशी के नाम से दुनियाभर में विख्यात पौराणिक नगरी में हर साल सावन का मेला शुरू होते ही देश प्रदेश के लाखों श्रद्धालु अवढरदानी के जलाभिषेक के लिए दूर-दूर से उमड़ते हैं।
हरिद्वार का प्रसिद्ध सावन मेला
                  देश ही नहीं दुनिया भर में प्रसिद्ध शिव भक्तों के लिए हर साल सावन का सबसे बड़ा मेला हरिद्वार में लगता है। जहाँ कांवड़ियों के पहुंचने का सिलसिला सावन की शुरुआत होते ही शुरू हो जाता है। महादेव के भक्त और समस्त कांवड़िये बम-बम भोले के जयकारों के साथ शिवालयों में महादेव की अराधना करते आपको इस महीने नज़र आ जाएंगे। जिसके बाद ये लोग गंगा का पवित्र जल कांवड़ में लेकर अपने स्थानीय मंदिरों की और रवाना हो जाते हैं।
काशी का भव्य विश्वनाथ मेला
                  सावन का एक अन्य सबसे बड़ा मेला उत्तरप्रदेश के काशी में भी हर साल लगता है। काशी के विश्वनाथ मंदिर और मेले का दिलदार करने के लिए राज्य के सात मार्गों से बड़ी तादाद में कांवड़िये यहां पैदल चलकर आते हैं। हर साल सावन के महीने में यहां आपको भोले के भक्तों की भारी भीड़ नज़र आ जाएगा।

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