अयोध्या ही नहीं इन जगहों से भी जुड़ी हैं भगवान राम की यादें


अयोध्या ही नहीं इन जगहों से भी जुड़ी हैं भगवान राम की यादें
                  जगत कल्याण के लिए त्रेता युग में भगवान विष्णु राम के रूप में तो मां लक्ष्मी सीता के रूप में धरती पर आई थीं। हिंदु धर्म में रामायण सबसे लोकप्रिय महाकाव्यों में से एक है। भगवान राम ने अपना जीवन अयोध्या के अलावा और कई स्थानों पर व्यतीत किया था। आज भी रामायण काल के  8 स्थान मौजूद हैं, जहां भगवान राम ने दिन गुजा़रे थे। आइए जानते हैं कैसा है आज इन स्थानों का हाल-

अयोध्या- राम जन्मभूमि
                  भगवान राम की जन्मभूमि है अयोध्या। अयोध्या भारत के उत्तर प्रेदश का एक प्राचीन धार्मिक नगर है।  वेदों में ‘अयोध्या’ को ईश्वर का नगर भी बताया गया है। रामायण काल में अयोध्या कौशल साम्राज्य की राजधानी थी। भगवान राम का जन्म रामकोट, अयोध्या के दक्षिण भाग में हुआ था। आज अयोध्या मशहूर पर्यटन स्थलों में से एक है। यहां आज भी भगवान राम के जन्म से जुड़े कई प्रमाण मिलते हैं। फिलहाल यहां राम जन्मभूमि विवाद चल रहा है। यहां हर दिन हजारों भक्त भगवान राम के दर्शन के लिए आते हैं।

प्रयाग- वनवास के दौरान किया था पहला विश्राम
                  जब राम, लक्ष्मण और सीता 14 साल के वनवास के लिए निकले थे, उस दौरान उन्होंने पहला विश्राम ‘प्रयाग’ में किया था। वर्तमान समय में प्रयाग को इलाहाबाद के नाम से जाना जाता है। यह उत्तर प्रदेश का एक अहम हिस्सा भी माना जाता है। यहां हर 6 साल में अर्धकुंभ और हर 12 साल में कुंभ मेला लगता है। इस दौरान पूरी दुनिया से करोड़ों श्रद्धालु गंगा, यमुना और सरस्वती के पवित्र त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगाने आते हैं। इस स्थान का जिक्र पवित्र पुराणों, रामायण और महाभारत में किया गया है।

चित्रकूट- वनवास के 11 साल यहीं बिताए थे
                  चित्रकूट मध्य  प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच में स्थित है।  रामायण के मुताबिक, भगवान राम ने सीता और लक्ष्मण के साथ अपने वनवास के 11 साल यहीं बिताए थे। यह वही जगह है जहां भरत वनवास के दौरान भगवान राम से मिलने आए थे। यहां आकर उन्होंने भगवान राम को पिता दशरथ के देहांत की खबर दी और उनसे घर लौट आने का अनुरोध किया था। यहां आज भी कई जगहों पर भगवान राम और सीता के पद चिन्ह मौजूद हैं और कई मंदिर भी।

जनकपुर- भगवान राम का ससुराल
                  जनकपुर नेपाल बॉर्डर से करीब 20 किमी आगे काठमाण्डु के प्रसिद्ध धार्मिक स्थान में से एक है। प्राचीन काल में यह स्थान मिथिला की राजधानी माना जाता था। यह माता सीता का जन्म स्थान है। यह शहर भगवान राम के ससुराल के रूप में मशहूर है। यहां पर भगवान राम और सीता का विवाह हुआ था। आज भी लोग भगवान राम और सीता के विवाह मंडप और विवाह स्थल के दर्शन के लिए आते हैं। कहा जाता है कि आज भी आस-पास के गांव के लोग विवाह के अवसर पर यहां से सिंदूर लेकर जाते हैं। इस सिंदूर से दुल्हन की मांग भरी जाती है। मनाते हैं कि ऐसा करने से सुहाग की उम्र लंबी होती है।

रामेश्वरम- राम सेतु का निर्माण
                  रामेश्वरम हिंदुओं का एक पवित्र तीर्थ स्थान है। यह तमिलनाडु के रामनाथपुरम में स्थित है। यह तीर्थ हिंदुओं के चारों धामों में से एक है। इसी जगह पर हनुमानजी की सेना ने लंकापति रावण तक पहुंचने के लिए राम सेतु का निर्माण किया था। इसके अलावा, भगवान राम ने इसी जगह पर माता सीता की वापसी के लिए भगवान शिव की अराधना की थी। इस सेतु को भारत में रामसेतु और दुनिया में एडम्स ब्रिज (आदम के पुल) के नाम से जानते हैं। बता दें इस पुल की लंबाई लगभग 30 मील है।

किष्किन्धा- सुग्रीव का राज्य
                  रामायण के अनुसार, किष्किन्धा को पहले वानर राज बाली का और उसके पश्चात् सुग्रीव का राज्य बताया गया है। कहा जाता है कि भगवान राम ने बाली को मारकर लक्ष्मण के हाथों सुग्रीव का अभिषेक इसी स्थान पर करवाया था। युनेस्को ने इस जगह को विश्व धरोहर में शामिल किया है।

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