सिद्धबली मंदिर: जहां भक्तों की हर मनोकामना होती है पूरी।


सिद्धबली मंदिर: जहां भक्तों की हर मनोकामना होती है पूरी
                 आज हम आपको हनुमान जी के एक प्रसिद्ध मंदिर के बारे में जानकारी देंगे जिसका नाम है ‘सिद्धबली’। उत्तराखंड की खूबसूरत पहाड़ियों के बीच कोटद्वार नगर में बसा सिद्धबली मंदिर हिंदुओं के मुख्य धार्मिक स्थलों में से एक है। इस मंदिर में न केवल भारत से बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालू आते हैं। इस मंदिर में होने वाली सुबह और शाम की आरती में कई भक्त शामिल होते हैं। हनुमान जी के इस मंदिर में प्रवेश करते ही आपको शांति का अनुभव होता है, यहां का सकारात्मक वातावरण आपके मन को शांति प्रदान करता है।

यहां होती हैं भक्तों की मन्नतें पूरी
                 सिद्धबली मंदिर में आकर लोग मन्नतें मांगते हैं और मनोकामना  पूरी होने पर मंदिर में भंडारे का आयोजन करते हैं। इस मंदिर में आकर भक्तों की मन्नतें पूरी होती हैं शायद यही कारण है कि साल 2025 तक के भंडारे यहां बुक हो चुके हैं। आपको बता दें कि यहां आकर जिस भी भक्त की मनोकामना  पूरी होती है वो यहां भंडारे का आयोजन जरुर करवाता है। मंदिर में रविवार और मंगलवार को विशेष भंडारे का आयोजन होता है। इस मंदिर के संचालकों की मानें तो उत्तराखंड के अलावा, दिल्ली, यूपी, पंजाब, महाराष्ट्र और राजस्थान के लोगों द्वारा भी यहां भंडारे बुक करवाये गये हैं।

सिद्धबली मंदिर का इतिहास
                 हनुमान जी के इस मंदिर के इतिहास की बात की जाए तो इस पौराणिक मंदिर का जिक्र स्कंद पुराण में भी मिलता है।
                सिद्धबली मंदिर को लेकर यह मान्यता है कि यहां गुरु गोरखनाथ जी ने तपस्या की थी। आज जहां सिद्धबली बाबा की मूर्ति स्थित है वहां पहले सिद्ध पिंडियां स्थापित थीं। कहा जाता है कि तब भी भक्तों का आना-जाना यहां लगा रहता था। इस मंदिर की ख्याति को देखते हुए 80 के दशक में यहां सिद्धबली बाबा की मूर्ति पूरे विधि-विधान से स्थापित की गई। धीरे-धीरे इस मंदिर को और भी सुंदर बनाया गया। मान्यता यह भी है कि संजीवनी बूटी की खोज में हनुमान जी इसी रास्ते गये थे। वर्तमान समय में सिद्धबली मंदिर में हर रोज कई श्रद्धालु आते हैं और मन्नतें मांगते हैं।

मंदिर से जुड़ी एक दिलचस्प कहानी
                 उत्तरांखड में सिद्धबली मंदिर को लेकर यह मान्यता है कि इस मंदिर को बनवाने में एक मुस्लिम अफसर की महत्वपूर्ण भूमिका थी। उत्तराखंड के लोगों के अनुसार अंग्रेजी शासन के दौरान एक मुस्लिम अफसर कोटद्वार से गुजर रहा था और उन्होंने कोटद्वार के आसपास कहीं विश्राम किया था। ऐसा माना जाता है कि इस अफसर को सपना आया कि जहां सिद्धबली बाबा की पिंडियां हैं वहां एक मंदिर बनवाया जाये। अफसर ने यह बात आसपास के लोगों को बताई तो लोगों द्वारा यहां एक छोटा सा मंदिर बनवा गया। यही छोटा मंदिर आज भव्य आकार ले चुका है और सिद्धबली धाम के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा हनुमान जी को बताशे, गुड़ और नारियल का चढ़ावा दिया जाता है।

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