‘मरी माता’ के इस अनोखे मंदिर में बिना प्रतिमा के ही होती है मां की पूजा।


मरी माता’ के इस अनोखे मंदिर में बिना प्रतिमा के ही होती है मां की पूजा।
                      यूँ तो मां दुर्गा के देशभर में अलग-अलग स्वरूपों में लाखों मंदिर आपको मिल जाएंगे जिसमें हर वर्ष विशेषतौर पर नवरात्रि के दौरान लाखों की संख्या में मां के भक्त दूर-दूर से आते हैं। अगर उत्तरप्रदेश की बात करें तो यहाँ भी आपको कई अनोखे मंदिरों के नाम सुनने को मिल जाएंगे, जिनका जिक्र कई पौराणिक शास्त्रों में भी होता है।

लखनऊ का अनोखा मंदिर
                      आज हम आपको उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक ऐसे अदभुद मंदिर के बारे में बताएँगे जो देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी खासा प्रसिद्ध है। सबसे अनोखी बात जो इस मंदिर को अन्य मंदिरों से अलग करती है वो ये हैं कि इस मंदिर में आपको किसी भी भगवान या देवी की कोई मूर्ति और प्रतिमा नहीं मिलेगी लेकिन बावजूद इसके कई वर्षों से यह मां दुर्गा के स्वरूप की पूजा होती है। आज ये मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का मुख्य केंद्र बन गया है। इस मंदिर की आस्था के चलते ही यहां सैकड़ों किलोमीटर दूर से भी भक्त अपनी मनोकामना लेकर यहाँ आते हैं और माता से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

मरी माता’ के नाम से दुनिया भर में प्रसिद्ध है मंदिर 
                      लखनऊ के  सुलतानपुर रोड पर अर्जुनगंज गांव के किनारे बने एक पुराने पुल के ऊपर निर्मित मां दुर्गा का ये मंदिर दुनियाभर में ‘मरी माता मंदिर’ के नाम से विख्यात है। बताया जाता है कि ये मंदिर बीते कई दशकों से यहाँ विराजमान है। जिसमें लगे असंख्य घंटे दूर से गुज़र रहे राहगिरियों का भी ध्यान अपनी ओर खींचते हैं।

इच्छा पूरी होने पर माता को चढ़ाया जाता है घंटा
                      इस मंदिर में सबसे अनोखी बात ये हैं कि मंदिर के गर्भगृह में माता की या अन्य किसी भी देवी-देवता की आपको कोई भी प्रतिमा या मूर्ति नहीं मिलेगी। लेकिन बावजूद इसके सप्ताह के सातों दिन हर समय यहां हजारों की संख्या में भक्तों का तांता लगा रहता है। इसके साथ ही नवरात्रों में तो इस मन्दिर की छटा दूर से ही देखते बनती है। नवरात्रि पर्व के दौरान इस मंदिर को बेहद सुन्दर सजाया जाता है। मंदिर के इतिहास की बात करें तो इस मंदिर के निर्माण को लेकर लोगों के बीच कई अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं। उन्ही पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कई वर्षों पूर्व यहां एक महिला सती हुई थी, जिसके बाद इस मंदिर का निर्माण कराया गया था। इसके साथ ही माना जाता है कि यहां आने वाले भक्तों की मन्नत पूरी होने के बाद उनके द्वारा यहाँ घंटा बाँधा जाना बेहद शुभ होता है। जिसकी संख्या अब अनगिनत हो चली है। मंदिर के अंदर बंधी इन लाखों घंटियों के चलते कई लोग इस मंदिर को अब ‘घंटी वाले मंदिर’ के नाम से भी जानने लगे हैं।

संध्या आरती का सुन्दर नज़ारा देखने दूर-दूर से आते हैं श्रद्धालु
                      हर वर्ष शरद व चैत्र नवरात्र के दौरान मंदिर के द्वार भोर में ही भक्तों के लिए खोल दिए जाते हैं। जिसके बाद दूर-दूर से देर रात तक यहाँ माता का आशीर्वाद पाने भक्तों की लंबी कतार लगी रहती है। इस मंदिर में नवरात्र के दौरान की जाने वाली संध्या आरती का नजारा भी अत्यंत सुखद और मनमोहक होता है, जिसमें भक्त खुद को डूबा हुआ महसूस करते हैं।

नवरात्रि पर होता है भव्य मेलों का आयोजन
                      इस वर्ष शारद नवरात्रि का आरम्भ 28 सितंबर से हो रहा है, ऐसे में नवरात्र को लेकर मंदिर प्रशासन द्वारा भी सभी तैयारियाँ पूरी हो चुकी हैं। इस मंदिर में विशेषतौर पर नवरात्रि व हिंदू नववर्ष के अवसर पर भव्य मेले और जवाबी कीर्तन का आयोजन भी हर साल किया जाता है। जिसमें भक्तों के साथ-साथ कई दिग्गज कलाकर अपने गीतों से माता की उपासना करते नज़र आते हैं।

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