कर्नाटक के इन शिव मंदिरों में आपको भगवान शिव के हर रूप के दर्शन हो जायेंगे ।


कर्नाटक के इन शिव मंदिरों में आपको भगवान शिव के हर रूप के दर्शन हो जायेंगे
                  हिन्दू धर्म में यूँ तो कई देवी-देवता हैं, लेकिन जो दर्जा देवों के देव महादेव को दिया गया है वो शायद ही किसी और भगवान को दिया गया है। भगवान शिव के भक्तों ने उनकी मूर्तियां और उनके भव्य मंदिर पूरी दुनिया में बनाए हैं।  भगवान शिव के कई ऐसे मंदिर भी हैं जिनका संबंध पौराणिक समय से जुड़ा हुआ है। यूँ तो देश और दुनिया के हर कोने में आपको भगवान शिव के भक्त मिल जायेंगे लेकिन आज हम आपको कर्नाटक के कुछ ऐसे मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं जहाँ जाकर आपको ऐसा अहसास होगा कि मानो अपने साक्षात् ही भगवान के दर्शन कर लिए हों।

महाबलेश्वर मंदिर
                  इस कड़ी में यहाँ हम जिस मंदिर का सबसे पहले ज़िक्र करने जा रहे हैं वो है महाबलेश्वर मंदिर। अपनी खूबसूरती के लिए लोगों के बीच प्रसिद्घ महाबलेश्वर मंदिर, गोकर्ण के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक माना जाता है जो की उत्‍तरी कन्‍नड़ जिले में मौजूद है। इस मंदिर में एक शिवलिंग स्थित है जो काफी समय से यहां आने वाले श्रद्धालुओं के बीच काफी प्रसिद्ध है। इस शिवलिंग को आत्‍मलिंग के नाम से भी जाना जाता है।  इस मंदिर में स्थित इस शिवलिंग को उतना ही पवित्र माना जाता है जितना काशी के बाबा विश्‍वनाथ को माना जाता है।

                  हिंदुओं के सात पवित्र मुक्ति-क्षेत्रों में से एक स्थान इस मंदिर को भी दिया गया है। अगर आप कभी भी इस मंदिर में दर्शन के लिए जाएं तो आपको अरब सागर में स्‍नान करके डुबकी का आनंद अवश्य‍य उठाना चाहिए। इस मंदिर की बनावट को पूरी तरह से द्रविड शैली के अनुसार बनाया गया है। भगवान शिव का ये खूबसूरत मंदिर सफेद ग्रे-नाइट के पत्थर से बनाया गया है। इस मंदिर की शिवलिंग वर्गाकार पीठ के रूप में है। इसके अलावा इस मंदिर के बीच में एक छेद है। इस छोटे से छेद से मंदिर में मौजूद शिवलिंग को साफ़ देखा जा सकता  है। हिंदू धर्म में भगवान शिव के इस मंदिर की काफी मान्यता है, ऐसे में ज़िंदगी में अगर आपको कभी भी मौका मिले तो इस मंदिर में ज़रूर आना चाहिए। शिवरात्रि के दिनों में इस मंदिर में काफी भीड़ होती है। 

मुरुदेश्वर मंदिर
                  इस कड़ी में हम भगवान शिव के जिस दूसरे मंदिर के बारे में बात करने जा रहे हैं उसके बारे में मान्यता है कि इस मंदिर का संबंध रामायण काल से है। भगवान शिव का यह अनोखा मंदिर कर्नाटक राज्य में उत्तर कन्नड़ जिले में स्थित है। इस जिले की भटकल तहसील में ही मुरुदेश्वर मंदिर है। इस मंदिर की सबसे खूबसूरत बात यह है कि ये मंदिर अरब सागर के तट पर बना हुआ है। ऐसे में समुद्र तट के पास होने की वजह से यहां का प्राकृतिक वातावरण हर किसी का मन मोह लेता है।

                  ये मंदिर बेहद सुंदर होने के साथ-साथ बहुत ही खास भी है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस मंदिर के परिसर में भगवान शिव की एक विशाल मूर्ति स्थापित हैं। वह मूर्ति इतनी बड़ी और आकर्षक है कि इसे दुनिया की दूसरी सबसे विशाल शिव प्रतिमा माना जाता है। मुरुदेश्वर मंदिर में स्थापित भगवान शिव की विशाल मूर्ति की ऊंचाई लगभग 123 फीट है। इस विशालकाय मूर्ति को इस ढंग से बनवाया गया है कि इस पर दिन-भर सूर्य की किरणें पड़ती रहती हैं जिससे यह चमकती रहती है और बेहद खूबसूरत प्रतीत होती है। 
मंजुनाथ मंदिर
                  इस लिस्ट में मौजूद हमारा तीसरा मंदिर है भगवान शिव का सुप्रसिद्ध मंजुनाथ मंदिर। मंजुनाथ मंदिर कर्नाटक के प्रसिद्ध शिव मंदिरों में से एक प्रसिद्ध शिव मंदिर हैं। मंजुनाथ मंदिर कर्नाटक के दक्षिण कन्नड जिले के धर्मस्थल नगर में बना हुआ भगवान शिव का एक और बेहद ही खूबसूरत मंदिर है। इस मंदिर में भगवान शिव की पूजा मंजुनाथ रूप में होती है।
                  बताया जाता है कि इस मंदिर में स्थापित भगवान शिव की प्रतिमा कांस्य से बनी है। इस प्रतिमा के बारे में ऐसी मान्यता  है कि दक्षिण भारत में यह अपने प्रकार की सबसे पुरानी प्रतिमाओं में से एक है। इस मंदिर में भगवान शिव के साथ भगवान गणेश, भगवान शास्ता, भगवान विष्णु, देवी दुर्गापरमेश्वरी और गो-मुख गणपति की प्रतिमाएं भी सुशोभित हैं। इस मंदिर के सामने सात जलकुंड बने हुए हैं, जिनके आसपास हरे-भरे बगीचे हैं और मंदिर के पीछे एक प्राकृतिक झरना बहता है। इस झरने को गो-मुख कहा जाता है। इसी झरने से जलकुंडों को पानी मिलता है। मंदिर परिसर में घुसने से पहले श्रद्धालु यहां पर डुबकी लगाते हैं और उसके बाद ही मंदिर परिसर में प्रवेश करते हैं। 

श्रीकंटेश्वर मंदिर
                  इस कड़ी में चौथे और आखिरी मंदिर का नाम है श्री कंटेश्वर मंदिर। श्री कंटेश्वर मंदिर कर्नाटक राज्य की तीर्थनगरी कहे जाने वाले नंजनगुड में बना भगवान शिव का एक बेहद खूबसूरत मंदिर है। यह एक बेहद प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर में भगवान भोलेनाथ की पूजा श्री कंटेश्वर नाम से होती है। यह मंदिर कावेरी नदी की सहायक नदी कपिला के तट पर स्थित है। भोलेनाथ का यह मंदिर भी दक्षिण काशी के नाम से जाना जाता है। श्री कंटेश्वर मंदिर  को नंजूनडेशवर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।

                  पूर्वजों के अनुसार इस मंदिर में भगवान शिव का वास था। स्थानीय लोगों का इस बात पर अटूट विश्वास है कि इस मंदिर में दर्शन मात्र से भक्तों के सभी दुःख और कष्ट दूर हो जाते हैं।इस मंदिर की नक्काशी बेहद ही खूबसूरत ढंग से की गयी है।

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