इन प्रसिद्ध तीर्थ-स्थलों का पानी है रोग-नाशक, एक बार ज़रूर करें इनके दर्शन।


इन प्रसिद्ध तीर्थ-स्थलों का पानी है रोग-नाशक, एक बार ज़रूर करें इनके दर्शन
                   भारत में मंदिर-मस्जिद-गुरुद्वारा-चर्च इन सभी की बहुत महत्ता बताई गयी है। इन पवित्र जगहों पर अक्सर पानी के छोटे-छोटे कुंड और झरने पाए जाते हैं। धार्मिक स्थलों में बने इन कुंड की भी कई विशेषताएँ बताई जाती हैं। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि इनमें से अधिकतर कुंडों में विशेष औषधीय गुण होते है। माना जाता है ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इन कुंड के पानी में कई तरह के खनिज तत्व उपस्थित होते हैं।  इन गर्म पानी के कुंडों में स्नान करने से कई तरह के रोग और बीमारियाँ जड़ से ठीक हो जाती हैं, खासकर त्वचा सम्बन्धी बीमारियाँ।

                   भारत में कई ऐसे कुण्ड है जो धार्मिक तीर्थस्थल पर है जिनसे इनका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। धार्मिक जगह और जल में औषधीय गुण होने के कारण इन जगहों पर साल भर लोगों की भीड़ लगी रहती है। इस लेख में हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ ऐसे ही कुंड के बारे में जिनके पानी को रोग-नाशक माना जाता है।

ये हैं वो तीर्थ-स्थान
गुरुद्वारा मणिकरण साहिब, हिमाचल प्रदेश
                   मणिकरण हिमाचल प्रदेश में कुल्लू से 45 किलोमीटर दूर है। इस जगह की ख़ासियत हैं यहाँ के गर्म पानी के चश्मे। गुरुद्वारा मणिकरण साहिब के कुंड में मौजूद जल में काफी ज़्यादा मात्रा में सल्फर, यूरेनियम और अन्य रेडियोएक्टिव तत्व मौजूद होता है। इतना ही नहीं इस कुंड के जल का तापमान भी बहुत ज़्यादा होता है। यह स्थान हिंदू और सिखों के लिए आस्था का केंद्र है। इस गुरुद्वारे के बारे में माना जाता है कि सिखों के पहले गुरु नानक देव अपने साथी मर्दाना के साथ यहां आए थे जिसके बाद ही यह गुरुद्वारा उन्हीं की याद में बनाया गया था।

                   यहाँ सबसे ताज्जुब की बात यह होती है कि इस गुरुद्वारे में आने वाले भक्त यहां के कुंड के पानी से दाल-चावल तक बनाते हैं।  साथ ही इस पवित्र कुंड में डुबकी लेने से उनके कष्ट भी दूर हो जाते हैं।

गुरुद्वारा श्री दमदमा साहिब, पंजाब
                   तख्त श्री दमदमा साहिब तलवंडी साबो, पंजाब में स्थित है। बताया जाता है कि यह गुरुद्वारा साहिब सिख धर्म के पवित्र पांच तख्तों में से एक है। इस तख्त की  ख़ासियत ये बताई जाती है कि श्री दमदमा साहिब वाली जगह पर सिखों के दसवें गुरु गो¨बद ¨सह ने आकर दम (आराम किया)लिया था, और इसी वजह के चलते इस जगह का नाम दमदमा साहिब पड़ा। काफी समय बाद गुरु गो¨बद जी ने ही इस गुरुद्वारा साहिब को सिखों के तख्त का दर्जा दे दिया था।

                   गुरु गो¨बद ¨सह ने इस धरती को गुरु की काशी का वरदान दिया। मान्यता है कि इस गुरुद्वारे में मौजूद कुंड से यदि कोई नहा ले तो उसके सभी कष्ट, बीमारियाँ यूँ ही दूर हो जाते हैं। इस बात के गवाह भी काफी लोग हैं शायद यही वजह है कि आज भी दूर-दूर से लोग इस गुरुद्वारे में माथा टेकने और कुंड में स्नान करने के लिए आते हैं।

स्वर्ण मंदिर, पंजाब
                   पंजाब के स्वर्ण मंदिर को हर-मंदिर साहिब के नाम से भी जाना जाता है. पंजाब के इस स्वर्ण मंदिर जिसे सिख धर्म का प्रमुख देव-स्थान माना गया है उसे देखने के लिए दुनिया भर से लाखों श्रद्धालु हर दिन यहाँ आते हैं. इस गुरुद्वारे में सिर्फ सिर्फ सिख धर्म के ही लोग नहीं बल्कि सभी धर्मों और विभिन्न देशों के लोग अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं. इस मंदिर का मुख्य केंद्र बिंदु मंदिर पर सोने की परत का चढ़ा होना माना जाता है।

                   हर गुरुद्वारे की ही तरह इस मंदिर में भी एक कुंड है जिसे काफी पवित्र माना गया है।  लोगों की आस्था है कि इस कुंड का पानी जो कोई भी अपने को स्पर्श करा ले उसके सभी कष्ट, बीमारियाँ और दुःख दूर हो जाते हैं।

श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा, उत्तराखंड
                   उत्तराखंड में स्थित हेमकुंड साहिब सिखों के पवित्र धार्मिक स्थल में से एक है। यह गुरुद्वारा उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल में है। हिमालय की गोद में बसा ये खूबसूरत हेमकुंड साहिब सिख धर्म के आस्था का प्रतीक माना जाता है। बता दें कि चारों तरफ से पत्थरीले पहाड़ और बर्फ से ढ़की चोटियों के बीच बसा ये हेमकुंड साहिब समुद्र तल से तकरीबन 4329 मीटर की ऊंचाई पर मौजूद है। इस गुरुद्वारे तक का सफर बहुत ही मुश्किल माना जाता है।

                   बता दें कि हेमकुंड साहिब के दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं को बर्फीले रास्ते से होकर जाना पड़ता है। यहां साल के अधिकतर समय या यूँ कहिये 7-8 महीने तक बर्फ की मोटी परत जमी रहती है जिससे यहाँ का मौसम बहुत ही सर्द बना रहता है। हेमकुंड साहिब में सिखों के दसवें गुरु कहे जाने वाले गुरुगोबिंद सिंह ने करीब 20 सालों तक घोर तपस्या की थी। कि जिस स्थान पर गुरु जी ने ध्यान लगाया था वहीं पर ये गुरुद्वारा बना हुआ है। गुरुद्वारे के साथ ही एक पवित्र सरोवर बहती है जिसे हेम सरोवर के नाम से जाना जाता है। गुरुद्वारे में माथा टेकने से पहले श्रद्धालु इस पवित्र सरोवर में स्नान करते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस सरोवर में डुबकी लेने से हर किसी के कष्ट और परेशानियों का अंत हो जाता है।

बंगला साहिब गुरुद्वारा, दिल्ली
                   राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सिखों का सबसे बड़ा धार्मिक स्थल गुरुद्वारा बँगला साहिब है जहाँ दूर-दूर से सैकड़ों भक्त आत्मिक शांति की तलाश में आते हैं। बताया जाता है कि बँगला साहिब गुरुद्वारा सिखों के आठवें गुरु, गुरु हरकिशन साहिब जी से जुड़ा है। मान्यता है कि यह गुरुद्वारा पहले जयपुर के महाराजा जय सिंह का बंगला हुआ करता था। जिसके बाद सिखों के 8वें गुरु हर किशन सिंह अपने दिल्ली में गुज़ारे वक़्त के दौरान यहाँ रुके थे।

                   ये वो वक़्त था जब देश में हैजा और स्मॉलपॉक्स जैसी बीमारियाँ फैली थीं। तब गुरु महाराज ने लोगों को अपने घर से पानी और दूसरी सेवाएं देकर उनकी भरपूर मदद की थी। मान्यता है कि यहां का पानी रोगनाशक है और इसी वजह से इसे बेहद पवित्र माना जाता है। दुनियाभर से सिख यहां दर्शन के लिए आते हैं और यहाँ से पानी भरकर अपने साथ ले जाते हैं।

हजूर साहिब गुरुद्वारा, महाराष्ट्र
                   हजूर साहिब गुरूद्वारा महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले में स्थित है। यह स्थान गुरु गोविंद सिंह जी का कार्य स्थल माना जाता है। यह गुरूद्वारा सिख धर्म के पांच प्रमुख तख्त साहिब में से एक है। जिसे तख्त सच-खंड साहिब, श्री हजूर साहिब और नादेड़ साहिब के नाम से भी जाना जाता है। नादेड़ साहिब गुरुद्वारे की स्थापना सन् 1708 में महाराजा रणजीत सिंह द्वारा करवाई गयी थी। इस गुरुद्वारे के कुंड के पानी से स्नान करने की मान्यता है। इस कुंड के पानी से स्नान करने से बड़े-से-बड़े कष्टों से छुटकारा अवश्य मिलता है।

श्री पटना साहिब गुरुद्वारा, बिहार
                   सिखों के दसवें और अंतिम गुरु, गुरु गोविंद सिंह का जन्म श्री पटना साहिब गुरुद्वारा, बिहार में 22 दिसंबर, 1666 को हुआ था. सिख धर्म के पांच प्रमुख तख्तों में दूसरा तख्त श्री हरि मंदिर जी पटना साहिब को ही माना गया है. सिखों के आखिरी गुरु का न ही केवल यहां जन्म हुआ था, बल्कि उनका बचपन भी यहीं गुजरा था.

                   बताया जाता है कि सिखों के तीन गुरुओं के चरण इस धरती पर पड़े हैं. यही वजह है कि देश और दुनिया के सिख संप्रदाय के लिए पटना साहिब हमेशा से ही आस्था का केंद्र रहा है. इस गुरुद्वारे का जल अपनी आलौकिक शक्तियों की वजह से हमेशा से भक्तों के बीच काफी आस्था का प्रतीक माना गया है।

फ़तेहगढ़ साहिब गुरुद्वारा, पंजाब
                   फतेहगढ़ साहिब हमेशा से सिखों की अटूट श्रद्धा और विश्वास का प्र‍तीक है. सिखों के लिए इसका महत्व‍ इस लिहाज से भी ज़्यादा माना गया है क्योंकि यही वो स्थान है जहाँ पर गुरु गोविंद सिंह के दो बेटों साहिबजादा फतेह सिंह और साहिबजादा जोरावर सिंह को सर-हिंद के तत्‍कालीन फौजदार वजीर खान ने दीवार में जिंदा चुनवा दिया था क्योंकि इन दोनों ने अपना धर्म परिवर्तन करने से इनकार कर दिया था.

                   फ़तेहगढ़ साहिब गुरुद्वारे का पानी गंगा की तरह पवित्र माना जाता है। यही कारण है कि यहाँ अटूट आस्था रखने वाले भक्त मानते हैं कि ये पानी कभी खराब नहीं होता। साथ ही मान्यता है कि इस पानी में नहाने से शरीर की एलर्जी ठीक हो जाती है।

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