क्यों हर मांगलिक कार्यक्रम से पहले बनाई जाती है रंग-बिरंगी ‘रंगोली’ ? - "अश्वमेध भारत"

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सोमवार, 25 नवंबर 2019

क्यों हर मांगलिक कार्यक्रम से पहले बनाई जाती है रंग-बिरंगी ‘रंगोली’ ?


क्यों हर मांगलिक कार्यक्रम से पहले बनाई जाती है रंग-बिरंगी ‘रंगोली’ ?
                      भारतीय संस्कृति में पौराणिक काल से ही रंगों का विशेष महत्व रहा है। ऐसे में रंगों के धार्मिक महत्व से तो सभी भली-भाँती अवगत होंगे ही लेकिन क्या आपको रंगों का वैज्ञानिक फायदा पता है। अगर नहीं तो आज हम आपको इसी सच से रूबरू कराएँगे।

धर्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि से रंगोली बनाना है ज़रूरी 
                       एक शोध में ये पूरी तरह साबित हो चुका है कि रंग विशेषकर मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक रामबाण औषधि के रूप में कार्य करते हैं। हिन्दू धर्म में हर मंगल कार्य से पहले लोग अपने आंगन या मुख्य द्वार पर रंग-बिरंगी रंगोली बनाते हैं। मान्यता अनुसार ऐसा करने से घर में शुभता एवं सकारात्मकता का प्रवेश होता है। इसीलिए भारत के लोग इसे घर की सुख-समृद्धि से जोड़कर देखते हैं। तीज-त्योहारों के मौके पर रंगोली व रंगों का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। यही कारण है कि दीपावली जैसे मुख्य त्योहारों से लेकर हर मांगलिक कार्यों में लोग अपने-अपने घरों में द्वार पर रंगोली सजाते हैं। लेकिन इसका महत्व सिर्फ साज - सज्जा या धार्मिक स्तर पर ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक स्तर पर भी बेहद अधिक है। तो चलिए जानते हैं कि आखिर रंगोली बनाने के कौन-कौन से रोचक फ़ायदे होते हैं:-

-रंग करते हैं मानसिक एवं शारीरिक समस्याएँ दूर
विज्ञान और विभिन्न चिकित्सा संग्रहालयों ने रंगों से निकलने वाले सकारात्मक प्रभाव को माना है। ऐसे में माना जाता है कि जब भी कोई व्यक्ति सीधे तौर पर रंगों के संपर्क में आता है तो इनसे उत्सर्जित ऊर्जा उस व्यक्ति पर अपना सकारात्मक प्रभाव डालती है, जिससे उसकी कई तरह की मानसिक एवं शारीरिक समस्याएँ दूर हो जाती हैं।  

-सकारात्मक ऊर्जा का होता है वास
                       देखा गया है कि विभिन्न रंगों और फूलों से बनाई गई रंग-बिरंगी रंगोली व्यक्ति के घर और आसपास के वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है, जिससे उस रंगोली को देखने वाले हर व्यक्ति का मन प्रसन्न तो होता ही है, साथ ही इससे आस-पास का वातावरण भी सकारात्मक होता है।

-ज्ञानमुद्रा से होता है व्यक्ति का बौद्धिक विकास
                       जब भी हम रंगोली बनाते वक़्त रंगों का इस्तेमाल करते हैं तो उस दौरान अंगुली और अंगूठा मिलकर ज्ञानमुद्रा बनाते हैं। योग विज्ञान की माने तो इस मुद्रा से मस्तिष्क को ऊर्जा के साथ-साथ सक्रिय बनने में मदद मिलती है। इसके साथ ही व्यक्ति के बौद्धिक विकास में भी ये मुद्रा महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है।

-एक्यूप्रेशर के लिए रंगोली बनाना है फ़ायदेमंद
                       एक्यूप्रेशर के लिहाज से भी ज्ञानमुद्रा हर व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए बेहद प्रभावी होती है। डॉक्टर्स की माने तो यह आपको हाई ब्लडप्रेशर से बचाती है और मानसिक व आत्मिक तौर पर भी आपको आत्मशांति प्रदान करती है।

-रंगोली बनाने से मिलती है तनाव से मुक्ति
                       जैसा सभी जानते हैं कि रंगोली बनाना एक प्रकार की कला ही होती है और जो लोग कलाप्रिय होते हैं वो रंगों का उचित इस्तेमाल कर बड़े शौक से रंगोली बनाते हैं। ऐसे में रंगोली बनाने का ये एक बड़ा फायदा तो है ही कि आप इसे बनाते समय बेहद सकारात्मक महसूस करते हैं। साथ ही इसे बनाते वक़्त अमूमन आप खुद को तनाव मुक्त भी महसूस करते हैं।

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