विदेश जाने की इच्छा रखने वाले भक्तों की मुराद इस मंदिर में होती है पूरी! - "अश्वमेध भारत"

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गुरुवार, 28 नवंबर 2019

विदेश जाने की इच्छा रखने वाले भक्तों की मुराद इस मंदिर में होती है पूरी!


विदेश जाने की इच्छा रखने वाले भक्तों की मुराद इस मंदिर में होती है पूरी!
                 आपने अपनी परेशानियों को दूर करने के लिये भगवान से मन्नतें तो मांगी होंगी। आप मन्नतों के पूरा होने पर मंदिरों में भी गए होंगे। हर इंसान बस यही चाहता है कि उसके जीवन में सुख समृद्धि बनी रहे उसके करीबियों को कोई परेशानी न आए। इसीलिये मंदिरों में जाकर लोग मुरादें मांगते हैं। लेकिन आज जिस मंदिर के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं उस मंदिर में लोग विदेश जाने की इच्छा से भी आते हैं।

                 जी हां! यह मंदिर हैदराबाद से 40 किलोमीटर दूर उस्मान सागर झील के किनारे स्थित है। इस मंदिर को चिल्कुर बालाजी नाम से जाना जाता है। माना जाता है कि यह मंदिर लगभग 500 साल पुराना है। इस मंदिर में लोग विदेश जाने की इच्छा के साथ तो आते ही हैं, साथ ही करियर से जुड़ी परेशानियों को दूर करने के लिये भी लोग यहां मुरादें मांगते हैं। कहा जाता है कि विदेश जाने की इच्छा रखने वाला यदि इस मंदिर में आए तो उसे विदेशों का वीजा मिल जाता है। इस मंदिर की वेबसाइट पर लोगों द्वारा दावे किये जाते हैं कि इस मंदिर में आने के बाद उनका वीज़ा लग गया। इसके साथ ही बालाजी का यह मंदिर कारीगरी के लिये भी जाना जाता है।

इस मंदिर से जुड़ी रोचक कथा
                 इस कथा के अनुसार जहां आज मंदिर स्थित है वहां कभी भगवान वेंकटेश बालाजी का भक्त रहा करता था। बालाजी का यह भक्त हर रोज बालाजी के दर्शन करने के लिये कई मील पैदल चलता था। बालाजी में इस भक्त की आस्था अटूट थी। लेकिन एक बार जब भक्त की तबीयत खराब हो गई और वह बालाजी के दर्शन करने नहीं जा पाया तो रात को स्वप्न में बालाजी ने भक्त को दर्शन दिये और उसे बताया कि, मेरे दर्शन करने के लिये इतना दूर आने की जरुरत नहीं है मैं तुम्हारे करीब ही हूं। बालाजी ने स्वप्न में भक्त को पास के ही जंगल की एक जगह बताई। सुबह के समय बालाजी का भक्त उसी जगह पर पहुंचा जिसका जिक्र स्वप्न में बालाजी ने किया था। वहां पर भूमि का कुछ हिस्सा बाहर की ओर निकला हुआ था। जब उस जगह की खुदाई की गई तो वहां से रक्त निकलने लगा औऱ उसी समय यह अाकाशवाणई हुई कि दूध से नहलाकर यहां एक मुर्ति की स्थापना करवाई जाए। कहते हैं कि जब दुग्धाभिषेक चल रहा था उसी दौरान जमीन से भूदेवी और श्रीदेवी की मूर्तियां भी अवतरित हो गईं। इन तीनों मूर्तियों को वहीं स्थापित कर दिया गया और बाद में वहां एक मंदिर का निर्माण करवाया गया।

इस मंदिर में नहीं चढ़ता चढ़ावा
                 इस मंदिर की खास बात यह भी है कि इसमें किसी भी तरह का चढ़ावा नहीं चढ़ता। यही वजह है कि इस मंदिर में दानपात्र भी नहीं है। यह मंदिर छात्र-छात्राओं के बीच भी काफी लोकप्रिय है। छात्र मानते हैं कि यहां मुराद मांगने से उनको परीक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में अच्छे परिणामों की प्राप्ति होती है।

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