जानें अयोध्या में होने वाली पांच और चौदह कोसी परिक्रमा का महत्व? - "अश्वमेध भारत"

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मंगलवार, 26 नवंबर 2019

जानें अयोध्या में होने वाली पांच और चौदह कोसी परिक्रमा का महत्व?

जानें अयोध्या में होने वाली पांच और चौदह कोसी परिक्रमा का महत्व?
                   भगवान राम की नगरी अयोध्या हिंदू धर्म के मुख्य धार्मिक स्थानों में से एक है। अयोध्या में पूरे साल भर कोई न कोई धार्मिक आयोजन होता ही रहता है। भक्त पूरे साल भर अयोध्या में आते हैं लेकिन कार्तिक मास में यहां होने वाली परिक्रमाओं में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। यहां 84, 14 और 5 कोसी परिक्रमाएं होती हैं। 14 कोसी परिक्रमा साल में एक बार होती है। साल 2019 में 14 कोसी परिक्रमा 6 नवंबर को थी वहीं 5 कोसी परिक्रमा 7 नवंबर को शुरु होगी और 8 नवंबर 11:56 मिनट तक चलेगी। मान्यता है कि कार्तिक मास में होने वाली इन परिक्रमाओं के दौरान भगवान विष्णु का देवोथान होता है। आज अपने इस लेख में हम आपको 14 और 5 कोसी परिक्रमाओं के बारे में जानकारी देंगे।

क्या है 14 और 5 कोसी परिक्रमा का महत्व
                   कार्तिक मास में होने वाली 14 कोसी परिक्रमा को कार्तिक परिक्रमा के नाम से भी जाना जाता है। 14 कोसी परिक्रमा में यदि कोई श्रद्धालु दिल से हिस्सा ले तो उसे शुभ फलों की प्राप्ति अवश्य होती है। मान्यता है कि 14  कोसी परिक्रमा के बाद इंसान के कई पाप धुल जाते हैं। इसी तरह पांच कोसी परिक्रमा करके भी लोगों को अच्छे फलों की प्राप्ति होती है। 14 काेसी परिक्रमा में भक्त अयोध्या शहर की परिक्रमा करते हैं। जबकि पांच कोसी में अयोध्या क्षेत्र की और 84 कोसी में पूरे अवध क्षेत्र की परिक्रमा की जाती है। आपको बता दें कि चौदह और पांच कोसी परिक्रमाओं के साथ कार्तिक मास में कार्तिक स्नान का भी बड़ा महत्व है। 

                   इस बार हो रही परिक्रमाओं में भक्तों के अंदर एक अलग सा उत्साह भी देखने को मिल रहा है। खबर है कि नवंबर के इस महीने में ही राम मंदिर पर फैसला भी आने वाला है। लोगों को उम्मीद है कि अयोध्या में अब राम मंदिर बनेगा। एक खबर के अनुसार चौदह कोसी परिक्रमा के दौरान श्रीराम जन्मभूमि के मुख्य पुजारी और बाबरी मस्जिद के मुद्दई एक साथ आए और चौदह कोसी परिक्रमा में आए लोगों से उन्होंने मुलाकात की। दोनों ही समुदायों के पुजारियों ने लोगों को एक साथ रहने का संदेश दिया।

                   इस परिक्रमा में भाग ले रहे श्रद्धालुओं ने राम जन्मभूमि मेें विराजमान रामलला के दर्शन भी किये और उन्होंने उम्मीद जताई की जल्द ही यहां भव्य मंदिर बनेगा। आपको बता दें कि राम जन्मभूमि को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार जिस जगह पर आज बाबरी मस्जिद है वहां कभी राम मंदिर था। इस बात के सबूत बाबरी मस्जिद में हुई खुदाई के दौरान मिले। कहा जाता है कि जब बाबरी मस्जिद की खुदाई हुई थी तो वहां से भगवान राम, हनुमान आदि की मूर्तियां मिलीं थीं। तभी से वहां राम मंदिर बनाने की बात चल रही है। हालांकि लंबे समय से इस मुद्दे पर कोई फैसला नहीं आया है। चूंकि 5 और 14 कोसी परिक्रमा के बाद इस माह सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आने के आसार हैं इसलिये अयोध्या क्षेत्र में सुरक्षा की व्यवस्था प्रशासन द्वारा कर दी गई है।

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