जानें पटना का वह स्थान, जो सिखों के लिए है बेहद खास ! - "अश्वमेध भारत"

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शुक्रवार, 22 नवंबर 2019

जानें पटना का वह स्थान, जो सिखों के लिए है बेहद खास !



जानें पटना का वह स्थान, जो सिखों के लिए है बेहद खास !
                     बिहार की राजधानी “पटना” एक धार्मिक और ऐतिहासिक शहर है। यह शहर न केवल हिंदुओं के लिए बल्कि सिख और जैन धर्म के अनुयायियों के लिए भी एक तीर्थ स्थल है। श्री गुरू नानक देव जी, श्री गुरू तेगबहादुर साहिब जी तथा श्री गुरू गोविंद सिंह जी ने पटना साहिब को अपने पावन चरणों से पवित्र किया है। सिख धर्म के इतिहास में भी पटना शहर खास महत्व रखता है। यह शहर सिखों के दसवें और अंतिम गुरु, श्री गोविंद सिंह जी के जन्म स्थान के रूप में जाना जाता है। तो चलिए आज इस लेख में आपको बताते हैं कि आखिर क्यों पटना साहिब सिखों के लिए खास है -

सिख धर्म का दूसरा प्रमुख तख्त
                     गुरु गोविंद सिंह जी जो सिखों के दसवें और अंतिम गुरु थे, उनका जन्म पटना में 22 दिसंबर, 1666 को हुआ था। वर्तमान में गुरु गोविंद सिंह जी के इसी जन्म स्थान पर एक विशाल गुरूद्वारा है, जिसे सिख धर्म के लोग तख्त श्री हरिमंदिर साहिब के नाम से जानते हैं। सिख धर्म के पांच प्रमुख तख्तों में यह दूसरा प्रमुख तख्त है। स्थानीय लोगों के अनुसार जिस इलाके में हरिमंदिर साहिब स्थित है, इसे हरिमंदिर गली के रूप में जाना जाता है। 

सिखों के लिए खास है पटना साहिब
                     सिखों के आखिरी गुरु का न केवल यह जन्मस्थल है, बल्कि उनका बचपन भी इसी स्थान पर गुज़रा था। यही नहीं सिखों के तीन गुरु श्री गुरू नानक देव जी, श्री गुरू तेगबहादुर साहिब जी और श्री गुरू गोविंद सिंह जी के चरण भी इस धरती पर पड़े हैं। इसी वजह से देश व दुनिया के सिख संप्रदाय लोगों के लिए पटना साहिब एक आस्था का केंद्र है। हरिमंदिर साहिब गुरुद्वारा गुरु गोविंद सिंह जी की याद में बनाया गया है, जहां आज भी उनके कई स्मृति चिन्ह श्रद्धालुओं को देखने को मिलते हैं। 

आज भी मौजूद है गुरू गोविंद सिंह जी के कई स्मृति चिन्ह
                     पटना साहिब का श्री हरिमंदिर साहिब गुरुद्वारा महाराजा रणजीत सिंह द्वारा बनवाया गया था। आज भी गुरु गोविंद सिंह की वह छोटी पाण जो बचपन में वे धारण करते थे, हरिमंदिर साहिब गुरुद्वारे में मौजूद है। इसके अलावा आने वाले श्रद्धालुओं को लोहे की छोटी चकरी जिसे गुरु बचपन में अपने केश में धारण करते थे, और छोटा बघनख खंज़र, जो वो कमर-कसा में धारण करते थे, देखने को मिलता है। जिस संदल लकड़ी के खड़ाऊ को गुरु तेग बहादुर जी महाराज पहना करते थे, उसे भी यहां रखा गया है, जो श्रद्धालुओं की श्रद्धा से जुड़ा है।

हरिमंदिर साहिब गुरूद्वारा में मिलती है मुफ़्त सुविधाएँ
                     गुरूद्वारा तख्त हरिमंदिर साहिब मे निःशुल्क तीन दिन तक ठहरने की व्यवस्था है। यहां लगभग 200 कमरे हैं। आप यहाँ के लिए ऑनलाइन रूम भी बुक कर सकते है। इसके अलावा यहां काफी संख्या में होटल और धर्मशालाएं भी हैं। पटना साहिब में भोजन के लिए लंगर की भी अच्छी सुविधा दी जाती है। श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज की रचना 'दशमग्रंथ' में भी लिखा है, 'तही प्रकाश हमारा भयो, पटना शहर बिखै भव लयो'। यहाँ जाकर इंसान को अलग सा सुकून मिलता है, तो इसीलिए इस पावन स्थल पर एक बार सभी को ज़रूर जाना चाहिए।

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