कराची के पंचमुखी हनुमान करते हैं भक्तों की हर मनोकामना पूरी। - "अश्वमेध भारत"

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रविवार, 24 नवंबर 2019

कराची के पंचमुखी हनुमान करते हैं भक्तों की हर मनोकामना पूरी।


कराची के पंचमुखी हनुमान करते हैं भक्तों की हर मनोकामना पूरी।
                     यूँ तो भारत और पाकिस्तान का विभाजन हुए तो लगभग 70 साल से भी ज्यादा का वक़्त हो चला है, लेकिन आज भी ऐसी कई चीज़े है जो इन दिनों देशों को एक साथ बाँधने का काम आज भी करती हैं। उन्हें में से एक चीज है पाकिस्तान स्थित पंचमुखी यानि पांच मुखों वाले हनुमान जी का मंदिर। जैसा कि आप सभी जानते हैं कि हनुमान जी को हिन्दू धर्म के प्रमुख देवता के रूप में पूजा जाता है। शास्त्रों में राम भक्त हनुमान जी को अकेले ऐसे देवता के रूप में माना गया है जो आज भी कलियुग में जीवित हैं और वो अपने सभी भक्तों की हर मुसीबत में उनके साथ खड़े दिखाई देते हैं।

                     भारत में स्थित आप हनुमान जी के ऐसे बहुत से मंदिरों से तो भली-भाँती अवगत होंगे, जहाँ दर्शन के लिए हर समय भक्तों का तांता लगा रहता है, लेकिन आज हम आपको पाकिस्तान में स्थित हनुमान जी के एक ख़ास मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं। आइये जानते हैं पाकिस्तान स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर के बारे में।

पाकिस्तान के कराची में स्थित है पंचमुखी हनुमान जी का मंदिर
                     बता दें कि पाकिस्तान के कराची में स्थित पंचमुखी हनुमान जी का मंदिर असल में भारत पाकिस्तान के बंटवारे से पहले हिन्दुस्तान का ही हिस्सा था। कराची स्थित हनुमान जी के इस मंदिर को बेहद चमत्कारी माना जाता है। यहाँ स्थित हनुमान जी की मूर्ति के पांच मुख हैं और इस वजह से भी ये मंदिर ख़ासा महत्वपूर्ण माना जाता है। पुरातत्व विभाग की माने तो इस मंदिर को हज़ारों साल पुराना माना जाता है। पाकिस्तान में होने के वाबजूद भी यहाँ हनुमान जी के दर्शन के लिए आने वाले भक्तों की संख्या में कभी नहीं आयी। सुबह से लेकर देर रात तक यहाँ श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। धर्म में आस्था रखने वाले लोगों का ऐसा मानना है कि यहाँ रामायण काल में भगवान् श्री राम भी आ चुके हैं।

कब और कैसे हुआ इस मंदिर का निर्माण
                     ऐसी मान्यता है कि कराची में जहाँ ये हनुमान मंदिर स्थित है वहां खासतौर से खुदाई के वक़्त मिटटी हटाने पर पंचमुखी हनुमान जी की मूर्ति मिली थी। कहते हैं कि ग्यारह बार मिट्टी हटाने के बाद हनुमान जी की मूर्ति वहां से निकाली गयी थी। इसके बाद ही यहाँ हमेशा के लिए उस मूर्ति को स्थापित किया गया। हालाँकि इसे मंदिर का रूप 1882 में दिया गया और भव्य रूप में इस मंदिर का निर्माण करवाया गया। यहाँ ऐसी मान्यता है कि हनुमान जी के दर्शन के लिए आने वाले भक्त यदि इस मंदिर के ग्यारह बार परिक्रमा कर लें तो उनकी सारी मुसीबतें दूर हो जाती हैं। बेहद चमत्कारी इस हनुमान मंदिर में आज भी दूर-दूर से पूजा के लिए आने वाले भक्तों की संख्या हज़ारों में रहती है। भारत और पाकिस्तान के विभाजन के बाद जो हिन्दू पाकिस्तान में रह गए उनके लिए हनुमान जी का ये मंदिर धर्म और आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। विशेष रूप से यहाँ मंगलवार और शनिवार के दिन भक्तों का हुजूम नजर आता है।

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