साधु-संतों की यूनियन अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के बनने की कहानी … - "अश्वमेध भारत"

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शुक्रवार, 22 नवंबर 2019

साधु-संतों की यूनियन अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के बनने की कहानी …



ये है साधु-संतों की यूनियन अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के बनने की कहानी
                      निर्मोही अखाड़ा अयोध्या विवाद में एक मुख्य पक्षकार है। अयोध्या मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद निर्मोही अखाड़े की लिखित दलील में ये कहा है कि विवादित भूमि का आंतरिक और बाहरी स्थान भगवान राम की जन्मभूमि के रूप में मान्य है। हम रामलला के सेवायत हैं। ये हमारे अधिकार में सदियों से रहा है। आज हम इस ख़बर के माध्यम से साधु संतों के इन अखाड़ों के बारे में जानेंगे। हम जानेंगे कि ये अखाड़े कैसे बनें, किसने इन अखाड़ों का निर्माण किया और हिन्दू साधु संतों के समाज में इन अखाड़ों की क्या भूमिका होती है।

आदि गुरु शंकराचार्य ने की थी अखाड़ों की शुरुआत
                      कुंभ मेला के दौरान आपने साधु संतों के अखाड़ों के शाही स्नान के बारे में मीडिया में ज़रुर सुना या देखा होगा। वर्तमान में विभिन्न मतों और संप्रदाय के अनुसार साधु संतों के 13 अखाड़ें हैं। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद इन अखाड़ाओं की प्रमुख संस्था है। इन अखाड़ाओं की शुरुआत आदि गुरु शंकराचार्य ने की थी।

                      सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए इन अखाड़ों का निर्माण किया गया था। इसलिए अखाड़ों में साधु-सन्यासियों को शस्त्र और शास्त्र दोनों की शिक्षा दी जाती है। हालाँकि अखाड़े बनने के बाद इनमें वर्चस्व की लड़ाई और दांव-पेंच होने लगे। इससे बचने के लिए साल 1954 में साधु संतों ने मिलकर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की स्थापना की।

                      अखाड़े के मुखिया को महामण्डलेश्वर के नाम से जाना जाता है। हालाँकि कुछ अखाड़ों में एक से अधिक महामण्डलेश्वर होते हैं तो कुछ अखाड़े बिना महामंडलेश्वर के ही कार्य करते हैं। ये अखाड़े मुख्य रूप से तीन मतों में इस प्रकार बटें हुए हैं।

1.     शैव संन्यासी संप्रदाय
शैव संन्यासी संप्रदाय में कुल सात अखाड़े आते हैं। ये अखाड़े मुख्य रूप से भगवान शिव के उपासक हैं। वे भगवान शिव के विभिन्न रूपों की आराधना करते हैं। हालाँकि शैव में शाक्त, नाथ, दशनामी, नाग जैसे उप संप्रदाय हैं।

श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी, दारागंज, इलाहाबाद, यूपी
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की पूजा की जिम्मेवारी इसी अखाड़े के पास है। यह परंपरा पिछले कई साल से चली आ रही है।

श्री पंच अटल अखाड़ा, चौक, वाराणसी, यूपी
इस अखाड़े में ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य ही दीक्षा ले सकते हैं।

श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी, दारागंज, इलाहाबाद, यूपी
यह अखाड़ा सबसे ज्यादा शिक्षित अखाड़ा है। इस अखाड़े में करीब 50 महामंडलेश्वर हैं।

श्री तपोनिधि आनंद अखाड़ा पंचायती, त्रयंबकेश्वर, नासिक
यह शैव अखाड़ा है जिसमें महामंडलेश्वर नहीं होते। आचार्य का पद ही प्रमुख होता है।

श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा, बाबा हनुमान घाट, वाराणसी
सबसे बड़ा अखाड़ा है। करीब 5 लाख साधु संत इससे जुड़े हैं।

श्री पंचदशनाम आवाहन अखाड़ा, दशाश्वमेध घाट, वाराणसी, यूपी
अन्‍य अखाड़ों में महिला साध्वियों को भी दीक्षा दी जाती है लेकिन इस अखाड़े में ऐसी कोई परंपरा नहीं है।

श्री पंचदशनाम पंच अग्नि अखाड़ा, गिरीनगर, भवनाथ, जूनागढ़, गुजरात
इस अखाड़े में केवल ब्रह्मचारी ब्राह्मण ही दीक्षा ले सकते है। कोई अन्य दीक्षा नहीं ले सकता है।

2.     वैरागी संप्रदाय
                      वैरागी संप्रदाय के अंतर्गत तीन अखाड़े आते हैं। वैरागी संप्रदाय के अखाड़े भगवान विष्णु को मानते हैं। इनमें बैरागी, दास, रामानंद, वल्लभ, निम्बार्क, माधव, राधावल्लभ, सखी और गौड़ीय शामिल हैं।

श्री दिगंबर अनी अखाड़ा, शामलाजी खाक चौक मंदिर, सांभर कांथा, गुजरात
इस अखाड़े को वैष्णव संप्रदाय में राजा कहा जाता है।

श्री निर्वानी अनी अखाड़ा, हनुमान गढ़, अयोध्या, यूपी
वैष्णव संप्रदाय के तीनों अनी अखाड़ों में से इसी में सबसे ज्यादा अखाड़े शामिल हैं। इनकी संख्या 9 है।

श्री पंच निर्मोही अनी अखाड़ा, धीर समीर मंदिर बंसीवट, वृंदावन, मथुरा, यूपी
अखाड़े में कुश्ती प्रमुख होती है जो इनके जीवन का एक हिस्सा है। अखाड़े के कई संत प्रोफेशनल पहलवान रह चुके हैं।

3.     उदासीन अखाड़ा
                      उदासीन संप्रदाय के आधीन तीन अखाड़े आते हैं। ये सिख-साधुओं का संप्रदाय माना जाता है। इसलिये इसमें दी जाने वाली शिक्षा-दीक्षा भी सिख पंथ से ली गई हैं। किंतु ये सनातनी परंपरा के वाहक हैं।

श्री पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ा, कृष्णनगर, कीडगंज, इलाहाबाद, यूपी
इस अखाड़े का उद्देश्‍य सेवा करना है। इस अखाड़े में केवल 4 महंत होते हैं जो हमेशा सेवा में लगे रहते हैं।

श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन, कनखल, हरिद्वार, उत्तराखंड
इस अखाड़े में 8 से 12 साल तक के बच्चों को दीक्षा दी जाती है।

श्री निर्मल पंचायती अखाड़ा, कनखल, हरिद्वार, उत्तराखंड
इस अखाड़े में धूम्रपान की इजाजत नहीं है। इस बारे में अखाड़े के सभी केंद्रों के गेट पर इसकी सूचना लिखी होती है।

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