जानें क्यों इतना प्रसिद्ध है मुंबई का सिद्धि विनायक मंदिर । - "अश्वमेध भारत"

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मंगलवार, 26 नवंबर 2019

जानें क्यों इतना प्रसिद्ध है मुंबई का सिद्धि विनायक मंदिर ।


जानें क्यों इतना प्रसिद्ध है मुंबई का सिद्धि विनायक मंदिर
                    बुधवार का दिन भगवान गणेश जी का दिन कहलाता है और गणपति महाराज देवताओं की सूची में सबसे पहले स्थान पर आते हैं। इसी कारण सभी धार्मिक या पवित्र कार्य की शुरुआत में गणेश भगवान की पूजा की जाती है। मुंबई में स्थित सिद्धि विनायक मंदिर बहुत ही प्रसिद्धि मंदिर है। इस मंदिर की विशेष बात तो ये है कि यह दुनिया के अमीर मंदिरों में प्रमुख रूप से गिना जाता है।

                    इस मंदिर में गणपति बप्पा के दर्शन के लिए देख-विदेश से लाखों श्रद्धालु आते हैं। यहाँ गणेश जी की प्रतिमा काले पत्थरों से बनाई गई है। मूर्ति में गणेश जी की सूंड दायीं तरफ़ है। वे अपनी दोनों पत्नियों ऋद्धि और सिद्धि के साथ विराजमान हैं। गणेश जी की प्रतिमा देखने में काफी आकर्षक लगती हैं।

सिद्धि विनायक मंदिर में होती हैं मनोकामना पूरी
                    धार्मिक मान्यता के अनुसार जो भक्त इस मंदिर में सच्चे मन से गणपति महाराज से कामना करते हैं उनकी मनोकामना अवश्य ही पूरी होती हैं। यहाँ भक्तों की मनोकामना पूरी होने पर वे झोली भर-भर कर भेंटे चढ़ाते हैं। इसलिए मंदिर में भारी मात्रा में दान आता है। अक्सर इस मंदिर में बॉलीवुड स्टार या देश-विदेश के प्रमुख उद्योगपति दर्शन के लिए आते हैं। आज हम इस मंदिर की कुछ विशेष बिंदुओं पर चर्चा करेंगे।

इस उद्देश्य से 1801 एक में हुआ था मंदिर का निर्माण
                    मुंबई स्थित प्रसिद्ध सिद्धि विनायक मंदिर का निर्माण 1801 में हुआ था। कहते हैं इस मंदिर को लक्ष्मण विथु पाटिल नाम के एक स्थानीय व्यक्ति ने बनवाया था। मंदिर में लगने वाली राशि को एक कृषक महिला ने दी थी जिसकी कोई संतान नहीं थी। वह इस मंदिर को इसलिए बनवाना चाहती थीं कि भविष्य में इस मंदिर में आने वाली महिलाओं को श्रीगणेश जी का आशीर्वाद प्राप्त हो और वह कभी बांझ न हो।

चाँदी से निर्मित हैं यहाँ गणेश जी के वाहन की विशाल मूर्तियाँ
                    इस मंदिर में गणेश जी के वाहन यानि चूहे की दो विशाल मूर्तियाँ चाँदी से बनी हुई हैं। मंदिर में आने वाले श्रद्धालु इन्हीं चूहों के कानों में अपनी मनोकामना मांगते हैं। माना जाता है कि चाँदी से निर्मित गणेश जी के वाहन की प्रतिमा उनका संदेश गणपति महाराज तक ले जाते हैं और फिर उनकी कामनाएँ पूर्ण होती हैं।

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