अयोध्या जाते समय इन प्राचीन धार्मिक धरोहर के भी करें दर्शन । - "अश्वमेध भारत"

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रविवार, 24 नवंबर 2019

अयोध्या जाते समय इन प्राचीन धार्मिक धरोहर के भी करें दर्शन ।


अयोध्या जाते समय इन प्राचीन धार्मिक धरोहर के भी करें दर्शन
अयोध्या की प्राचीन धार्मिक धरोहरें
                        बता दें कि अयोध्या का हिन्दू धर्म में हमेशा से ही अपना एक विशेष महत्व रहा है। जिसके चलते भी अयोध्या का इतिहास अब एक आकर्षक का केंद्र बन चूका है। इसके प्राचीन इतिहास को देखें तो उस समय भी ये सबसे पवित्र शहरों में से एक था जहां हिंदू धर्म के विद्वानों ने इस पवित्र स्थान का एकजुटता के साथ सुन्दर निर्माण कर इसके महत्व में अपना योगदान दिया था। पौराणिक मान्यताओं अनुसार इस जगह को एक ऐसे शहर के रूप में वर्णित किया गया था जो देवताओं द्वारा ही बनाई गई थी और वो उस समय स्वर्ग की तरह समृद्ध थी। लेकिन समय के साथ इसमें कई बदलाव कर दिए गए। ऐसे में आज हम आपको अयोध्या की उन प्राचीन धार्मिक धरोहरों के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं, जहाँ जाकर आपको इस स्थान के पौराणिक महत्व का वर्णन मिलेगा।  

लक्ष्मण घाट
                 अयोध्या का लक्ष्मण घाट बेहद प्रसिद्ध घाटों में से एक है, जहाँ आपको इस घाट पर लक्ष्मण जी का एक प्राचीन मंदिर मिलेगा। इस मंदिर में आपको पांच फुट ऊंची लक्ष्मण जी की एक प्राचीन मूर्ति के दर्शन करने का अवसर भी मिलेगा। माना जाता है कि लक्ष्मण की ये भव्य मूर्ति, मंदिर के सामने वाले कुंड में पाई गई थी। कहते है कि यही को घाट है जहाँ से लक्ष्मण जी परम धाम पधारे थे।

अहिल्याबाई घाट
                 मान्यताओं अनुसार अहिल्याबाई घाट पर ही भगवान श्रीराम ने महा यज्ञ किया था। इस घाट के थोड़ी दूर आपको त्रेतानाथजी के मंदिर के दर्शन करने मिलते हैं। जिसमें भगवान राम अपनी पत्नी सीता संग विराजमान हैं।

स्वर्गद्वार घाट
                 स्वर्गद्वार घाट के समीप आपको भगवान राम के पुत्र कुश द्वारा निर्मित श्री नागेश्वरनाथ महादेव जी का मंदिर मिलता है। स्वर्गद्वार घाट के इतिहास को लेकर कहा जाता है कि बाबर ने जब रामलला के जन्म स्थान के मंदिर को खंडित किया था तो उस वक़्त मंदिर के पुजारियो ने भगवान राम की मूर्ति उठाकर इसी घाट पर स्थापित कर दी थी। आज इसी घाट पर देश-विशेष से आकर लोग पिंडदान करते है।

हनुमानगढी
                 हनुमान गढी सरयू तट से लगभग एक मील दूर बसे एक छोटे से नगर में स्थित है। यहाँ आपको एक ऊँचे टिले पर चार कोट का छोटा सा दुर्ग दिखाई देगा, जिसमें से ही करीब 60 सीढ़ियां चढकर हनुमानजी के मंदिर में जाने का स्थान है। मंदिर के चारों ओर आपको गाँव मिलेगा जिसके घरों में अयोध्या के साधु संत सालों से रह रहे हैं। हनुमानगढी के दक्षिण में सुग्रीव टिला और अंगद टिला मौजूद है।

दर्शनेश्वर
                 हनुमानगढी से कुछ दूरी पर आपको अयोध्या नरेश के श्री राम के दर्शन करने को मिलते हैं। जिसकी सुंदर वाटिका में दर्शनेवर महादेव का एक प्राचीन सुंदर मंदिर है।

कनक भवन
                 कनक भवन में ही अयोध्या का मुख्य मंदिर निर्मित है। माना जाता है कि इस प्राचीन मंदिर का निर्माण ओरछा नरेश ने किया था। अयोध्या के सभी भव्य एवं विशाल मंदिरों में इसका नाम सबसे पहले आता है। इसे आज भगवान श्रीराम का अंत:पुर और माता सीता का महल कहते है। इसलिए इसमें आपको मुख्य तौर पर भगवान राम और मां सीता के ही दर्शन होते है। इसमें मौजूद सिंहासन पर आपको बड़ी मूर्तियां दिखाई देंगी, जिसके आगे सीता- राम की एक छोटी मूर्ति के भी दर्शन करने मिलते है। जिन्हे बेहद प्राचीन बताया जाता है। इस मंदिर की भव्यता ही इसके इतिहास का वर्णन करती है, जिसके चलते ही इस मंदिर को मुख्य मंदिर माना जाता है।

जन्म स्थान
                 कनक भवन से आगे आपको श्रीराम जन्मभूमि दिखाई देगी। बता दें कि अयोध्या का यही वो विवादित स्थान है, जिसको लेकर कई वर्षों से विवाद चल रहा है। इसके बारे में माना जाता है कि यहां एक प्राचीन मंदिर हुआ करता था जिसे तुड़वाकर बाबर ने बाबरी मस्जिद का निर्माण करवाया था। परंतु अब यहाँ फिर से श्रीराम की मूर्ति विराजमान है। उस प्राचीन मंदिर के घेरे में राम जन्मभूमि का एक छोटा प्राचीन मंदिर और भी बना हुआ है। इसके अलावा जन्म स्थान के आस-पास आपको कई प्राचीन मंदिर दिखाई देंगे। जिसमें गीता रसोई, चौबीस अवतार, कोप भवन, रत्नसिहासन, आनंद भवन, रंग महल, इत्यादि शामिल हैं।

तुलसी चौरा
                 अयोध्या के राजमहल के दक्षिण में एक खुले बड़े मैदान मे तुलसी चौरा है। इस स्थान को लेकर मान्यता है कि ये वही स्थान है जहाँ विद्वान गोस्वामी तुलसीदास जी ने श्री रामचरित्र मानस की रचना की थी। इसी कारण इस जगह का नाम भी तुलसी चौरा पड़ा था।

मणि पर्वत
                 तुलसी चौरा से करीब एक मील दूर अयोध्या रेलवे स्टेशन के पास जंगल में एक बड़ा टीला है, जिसके ऊपर प्राचीन मंदिर है। माना गया है कि यही पर सम्राट अशोक के 200 फुट ऊँचे एक स्तूप का अवशेष मिलता है।

दातुन कुंड
                 यह स्थान मणि पर्वत के बेहद निकट है। दातुन कुंड को लेकर मान्यता है कि इसी स्थल पर भगवान श्रीराम रोज़ाना दातुन करते और दातुन के समय इसी कुंड का पानी इस्तेमाल करते थे। कुछ लोग तो ये भी कहते हैं कि जब गौतम बुद्ध अयोध्या में रहने आए थे तब उन्होंने भी यहीं दातुन किया था। जिस दौरान एक बार उन्होने अपनी दातुन इसी स्थान पर गाड़ दी । जो बाद में एक सात फुट ऊंचा वृक्ष में तब्दील हो गई थी। हालांकि वह चमत्कारी वृक्ष अब नही है। परंतु उसका स्मारक अब भी आपको यहाँ मिल जाएगा।

दशरथ तीर्थ
                 सरयू तट पर स्थित दशरथ तीर्थ की दूरी रामघाट से लगभग 8 मील ही है। मान्यता है कि यही वो पवित्र स्थान है जहाँ महाराजा दशरथ का अंतिम संस्कार हुआ था। इसलिए इसका नाम दशरथ तीर्थ रखा गया।

छपैया
                 छपैया एक प्राचीन गाँव है, जिसका उल्लेख आपको पौराणिक कथाओं में भी मिल जाएगा। ये गाँव सरयू नदी के पार बसा हुआ है। जिसकी दूरी अयोध्या से लगभग 6 मील है। इस स्थान को स्वामी सहजानंद जी की जन्मभूमि बताया जाता है।

नंदिग्राम
                 नंदिग्राम फैज़ाबाद से लगभग 10 मील तथा अयोध्या से लगभग 16 मील दूर है। मान्यता है कि भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण जी के 14 वर्ष के वनवास के समय भगवान भरत ने यही पर 14 वर्ष तक कठोर तपस्या की थी। इसलिए आपको यहाँ भरतकुंड सरोवर और भरत जी का एक भव्य मंदिर भी मिल जाएगा।

सोनखर
                 मान्यताओं अनुसार इसी स्थान पर महाराजा रघु का कोषागार था। माना ये भी जाता है कि भगवान कुबेर ने इसी स्थान पर सोने की वर्षा की थी, जिसके बाद इसका नाम सोनखर पड़ा।

सूर्य कुंड
                 रामघाट से सूर्य कुंड की दूरी लगभग पांच मील है। यहाँ तक पहुँचने के लिए आपको पक्की सड़क मिलेगी। इस स्थान पर एक बड़ा सरोवर है, जिसके चारों ओर कई प्रसिद्ध घाट बने हुए है और इसके पश्चिम किनारे पर सूर्य नारायण का एक विशाल मंदिर निर्मित है।

गुप्तारघाट
                 गुप्तारघाट अयोध्या से पश्चिम दिशा में सरयू किनारे से लगभग 9 मील की दूरी पर स्थित है। जहाँ सरयू स्नान का पौराणिक और धार्मिक बहुत विशेष महत्व बताया गया है। घाट के पास आपको गुप्तहरि के मंदिर के दर्शन करने को मिलते हैं।

जनौरा
                 मान्यता है कि जब भी श्री राम के ससुर महाराजा जनक अयोध्या पधारते थे तो विश्राम के लिए अपना शिविर यही पर लगाते थे। यह स्थान अयोध्या से लगभग सात मील दूर है। जहाँ आपको गिरिजाकुंड नामक एक सरोवर तथा एक प्राचीन शिव मंदिर के दर्शन हो जाएंगे।

                 इसके अलावा यदि आप अयोध्या जाते हैं तो आपको कालाराम मंदिर, नागेश्वरनाथ मंदिर, हनुमान गढ़ी का हनुमान मंदिर, छोटी देव काली मंदिर आदि मंदिरों के भी दर्शन करने का अवसर मिलेगा, जिसकी प्राचीन महत्वता इन्हे विश्व में विख्यात बनाती है।

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