वो रानी जिसने मुहम्मद घॊरी के पिछवाडे को इतना चीर फाड दिया कि वह कभी बाप न बन सका..



वो रानी जिसने मुहम्मद घॊरी के पिछवाडे को इतना चीर फाड दिया कि वह कभी बाप न बन सका.. क्या नायकी देवी के बारे में जानते हैं आप?
                   महम्मद घॊरी का नाम सुनते है ही खून खौलता है जिसने हिन्दुओं का नरसंहार किया था जिसने पृथ्विराज चौहान को धोके से हराया था। जिसने संयॊगिता की इज़्ज़त लूटी थी। जिसने हिन्दू मंदिरों को लूट कर उन्हे क्षत विक्षत किया था। घॊरी मानव कहलाने के लायक नहीं वह तो एक दरिंदा था। लेकिन उस दरिंदे को एक रानी ने चीर फाड के रखदिया था यह बात हम में से कॊई नहीं जानता।

                   भारत की औरतें जनम से ही शेरनी है। अपने मान-सम्मान और गरिमा के लिए वह धधकती आग तक में कूद जाती है। हमारा इतिहास हमें उन साहसी महिलाओं के बारे में नहीं बताती जो मुघलॊं से लडी है। अपितु उन बलात्कारियों को महान बताकर उनके दोहे लिखी जाती है। आँख मूँदकर झूठे इतिहास पर विश्वास करना कॊई हम बेवकूफ हिन्दुओं से सीखे।

                   इतिहास ने हमें कभी गुजरात की रानी नायकी देवी के बारे में नहीं बताया है। 1178 AD में माउंट अबू के समीप की यह घटना है। घॊरी निहायती घटिया आदमी था। विकृत कामी घॊरी पुरुष, महिला या बच्चे किसीको नहीं छॊडता था। अपने हवस के चलते वह कामांध हो गया था। । बूढ़े-बच्चे-जवान-महिला-पुरुष सबका बलात्कार करता था और हिन्दुओं का नरसंहार करता था।

                   घॊरी ने मुल्तान पर फ़तेह पा लिया था। अब वह गुजरात पर कब्ज़ा करना चाहता था। उसने रानी नायकी देवी की सुंदरता और उनकी साम्राज्य के संपत्ती के बारे में सुन रखा था। सहज ही उसके मन में लालसा आई होगी जो पैदाईशी बलात्कारी और लुटेरा हो। वह अपना सेन्य काफिला लेकर गुजरात की राजधानी अन्हिल्वारा पर विजय पाने की मनशा से निकल पडा।

                   जब रानी को पता चला की घॊरी उसकी राज्य की ओर कूच कर चुका है तो उसने सभी हिन्दू राजाओं से सहायता माँगी। लेकिन पृथ्विराज चौहान सहित सभी राजाओं ने सहायता से इन्कार करदिया सिवाए नरवाल के राजा के जिन्होने रानी को अपने तरफ़ से हाथी की सेना प्रादान किया। रानी ने अपनी सेन्य को युद्ध के लिए तयार किया और शेरनी की भाँती धहाडती हुई रणभूमी के लिए कूच करगई।

                   दोनों सैन्य का आमना सामना कयादारा में हुआ जो की राजधानी से कुछ ही दूर था। घॊरी ने अप्ने घुलाम को रानी के सैन्य के पास भॆजा और कहा कि अगर वे अपनी रानी ,उसकी बच्चे और अन्य महिलाओं को सॊने के साथ उसे सौंप दे तो वह उनको छॊड देगा। रानी बिल्कुल नहीं घबराई उसने अपने बच्चे को गोद में बाँध लिया और मुस्कुराई और घॊडे पे चड गई। वह घॊरी के घुलाम को कहती है की वह अपने आका से बॊले की उसकी सारी माँगे पूरी हो जाएगी लेकिन वह पहले द्वारकाधीश मंदिर जाकर भगवान का दर्शन करना चाहेगी।

                   भगवान की मन में ही प्रार्थना कर नायकी देवी “जय द्वारकाधीश” दहाडती है और युद्ध के लिए निकल पडती है। घॊरी का घुलाम रानी द्वारा भेजी गयी संदेश पहुँचाता है तो घॊरी के मन में लड्डू फूटने लगते हैं। वह मन ही मन खुश होता है और रानी के साथ अपनी अय्याशियों की कल्पना करने लगता है। रानी को आते हुए देख वह खुश होता है लेकिन… रानी उधर ही रुक जाती है। इससे पहले की उसे कुछ भी पता चले रानी का सेन्य उसे पीछे से घेर लेता है।

                   वासना ग्रस्त घॊरी समझ ही नहीं पाता की आखिर हिन्दू इतने क्षिप्र कैसे हो सकते हैं इससे पहले की वह युद्द के लिए तयार हो रानी की सेना उसे तीनों ओर से घेर लेती है। यह देख कर घॊरी घबरा कर दुम दबाकर भागने लगता है। जैसे कसाई सुअर को काटता हो वैसे ही मुघल सुअरों को रानी के सैनिक काटते चले जाते हैं। शेरनी दहाड रही थी और घॊरी लॊमडी भाग रहा था। रानी दुर्गा के जैसे दोनों हाथों में तलवार लिये घॊरी का पीछा करती है। सारे सुवरों को मार गिराते हुए वह घॊरी तक पहुँचती है। घॊरी आगे …रानी पीछॆ…

                   घॊरी का पीछा करते हुए रानी उसके समीप पहुँचती है।अपने तलवार को वह घॊरी पर चलाती है और वह तलवार घॊरी का पिछवाडा ही चीर देता है! वाह रे भारत की शेरनी तेरा जयकार हो। तेरा नाम अमर रहे। एक बलात्कारी का पिछवाडा ही चीर फाड के रखदिया शेरनी ने। रानी घोरी को मौत के घाट उतार ही देती लेकिन उसके सुअर घुलामों ने घॊरी को घेर कर बचा लिया। अपने चीरे हुए पिछवाडे के साथ घॊरी भागता रहा भागता रहा और मुल्तान जाकर ही रुका।

                   रानी नायकी देवी की मिसाल हर औरत, हर हिन्दू को देना चाहिये। रानी के पराक्रम से घोरी इतना डर गया की फिर कभी उसने गुजरात की तरफ़ मुड के नहीं देखा। घोरी का काम लिप्सा हमेशा हमेशा के लिए खत्म हो गया। उसका चीरा हुआ पिछवाडा उसे हमेशा हिन्दू शेरनी का याद दिलाता रहा। रानी ने उसके पिछवाडे को इतना चीर दिया था की वह पिता तक नहीं बनपाया और अपने लैंगिक घुलामों को ही अपना उत्तराधीकारी बनाया। यह है भारतीय नारी का पराक्रम।

जय जयकार शेरनी रानी नायकी देवी का। अपने बच्चों को ज़रूर बताना रानी के शौर्य के बारे में। पाठशाला में तो पढ़ाएंगे नहीं।

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