मैसूर (कर्नाटक) : झील सूखी तो निकल आए प्राचीन नंदी - "अश्वमेध भारत"

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रविवार, 8 सितंबर 2019

मैसूर (कर्नाटक) : झील सूखी तो निकल आए प्राचीन नंदी

मैसूर (कर्नाटक) : झील सूखी तो निकल आए प्राचीन नंदी
                         नंदी की इन प्राचीन प्रतिमाओं को लेकर दावा किया जा रहा है कि ये १६वीं  या १७वीं शताब्दी की हो सकती हैं ! लोग इसे सावन महीने में भगवान शिव से भी जोडकर देख रहे हैं !
                         कर्नाटक के मैसूर में एक सूखी झील की खुदाई के बाद वहां से भगवान शिव की सवारी माने जानेवाले नंदी बैल की सैकडों साल पुरानी प्रतिमा मिली है जो स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है ! खुदाई के बाद नंदी की बेहद पुरानी प्रतिमा की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं ! (तस्वीर – राजेश खारवार)
                         मैसूर से करीब २० किलोमीटर दूर अरासिनाकेरे में जब एक सूखी हुई झील की खुदाई की गई तो लोग नंदी की विराट प्रतिमा देखकर हैरान रह गए ! यहां नंदी बैल की एक नहीं बल्कि दो मूर्ति पाई गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार इन प्रतिमाओं को ढूंढने का काम खुद स्थानीय लोगों ने ही किया है। (तस्वीर – पुरातत्व विभागकर्नाटक)
                        सैकडों साल पुरानी इन प्रतिमाओं को लेकर सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है किअरासिनाकेरे के बुजुर्ग झील में नंदी की मूर्ति होने की बात किया करते थे और जब झील में पानी कम होता था तो नंदी का सिर नजर आता था ! बुजुर्गों की इन्हीं बातों पर भरोसा कर इस बार झील सूखने के बाद स्थानीय लोगों ने खुदाई शुरू कर दी ताकि सच्चाई का पता लगाया जा सके ! (तस्वीर – पुरातत्व विभागकर्नाटक)
                        स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार नंदी की इस प्रतिमा को ढूंढने के लिए गांववालों को तीन से चार दिनों तक लगातार खुदाई करनी पडीजिसमें जेसीबी मशीन की भी मदद ली गई। अब नंदी बैल की इन मूर्तियों को बाहर निकाल लिया गया है। (तस्वीर – पुरातत्व विभागकर्नाटक)
                        इस खबर के सोशल मीडिया पर वायरल होते ही पुरातत्व विभाग के अधिकारी भी मौके पर जांच करने पहुंचे। नंदी की प्राचीन प्रतिमाओं को लेकर दावा किया जा रहा है कि ये १६वीं  या १७वीं शताब्दी की हो सकती हैं ! लोग इसे सावन महीने में भगवान शिव से भी जोडकर देख रहे हैं ! (तस्वीर – पुरातत्व विभागकर्नाटक)





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