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अपराधी। तेनाली राम की कहानियाँ ।

एक दन राजा कॄणदेव राय व उनके दरबार, दरबार म बैठे थे। तनेाल राम भी वह ंथ े। अचानक एक चरवाहा वहॉ आया और बोला, " महाराज, मेर सहायता किजए। मेरे साथ याय किजए।" "बताओ, तुहारे साथ या हुआ है?" राजा ने पूछा। "महाराज, मेरे पडोस म ेएक कंजसू आदमी रहता है। उसका घर बहुत पुराना हो गया है , परत ुवह उसक मरमत नह ंकरवाता। कल उसके घर क एक दवार गर गई और मेर बकर उसके नीचे दबकर मर गई। कॄपया मेरे पडोसी स ेमेर बकर का हजाना दलवान ेम मरे सहायता किजए।" महाराज के कुछ कहन ेके पहल ेह तनेाल राम अपने थान स ेउठा और बोला, "महाराज, मेरे वचार स ेदवार टूटन े के लए केवल इसके पडोसी को दोषी नह ंठहराया जा सकता।" "तो फर तुहारे वचार म दोषी कौन है?" राजा ने पूछा।
"महाराज, यद आप मुझ ेअभी थोडा समय द, तो म इस बात क गहराई तक जाकर असल अपराधी को आपके सामन ेतुत कर दंगूा।" तनेाल राम न ेकहा। राजा ने तनेाल राम के अनुरोध को मान कर उस ेसमय दान कर दया। तनेाल राम न ेचरवाहे के पडोसी को बुलाया और उस ेमर बकर का हजाना देन ेके लए कहा। पडोसी बोला, "महोदय, इसके लए म दोषी नह ंहूँ। यह दवार तो मने मी स ेबनवाई थी, अतः असल अपराधी तो वह मी है, िजसन ेवह दवार बनाई। उसन ेइस े मजबूती स ेनह ंबनाया। अतः वह गर गई।" तनेाल राम न ेमी को बुलवाया। मी न ेभी अपन ेको दोषी मानन ेस ेइनकार कर दया और बोला, "अनदाता, मुझ ेयथ ह दोषी करार दया जा रहा है जबक मेरा इसम कोई दोष नह ंहै। असल दोष तो उन मजदरू का है, िजहने गारे म अधक पानी मलाकर मण को खराब बनाया,िजसस ेट अछ तरह स ेचपक नह ंसक ंऔर दवार गर गई। आपको हजान ेके लए उह बुलाना चाहए।" राजा ने मजदरू को बुलान ेके लए अपन ेसैनक को भजेा। राजा के सामन ेआत ेह मजदरू बोले, "महाराज, इसके लए हम दोषी तो वह पानी वाला यित है, िजसन ेगारे चून ेम अधक पानी मलाया।" अब क बार गारे म पानी मलाने वाल ेयित को बुलाया गया। अपराध सुनत ेह वह बोला, "इसम मेरा कोई दोष नह ंहै महाराज, वह बतन िजसम पानी हुआ था , वह बहुत बडा था। िजस कारण उसम आवयकता स ेअधक पानी भर गया। अतः पानी मलात ेवत मण म पानी क माा अधक हो गई। मेरे वचार स ेआपको उस यित को पकडना चाहए, िजसन ेपानी भरन ेके लए मुझ ेइतना बडा बतन दया। तनेाल राम के पूछन ेपर क वह बडा बतन उसे कहॉ स ेमला, उसन ेबताया क पानी वाला बडा बतन उस ेचरवाहे न ेदया था, िजसम आवयकता स ेअधक पानी भर गया था| तब तनेाल राम न ेचरवाहे से कहा, "देखो, यह सब तुहारा ह दोष है। तुहार एक गलती न ेतुहार ह बकर क जान ले ल।" चरवाहा लिजत होकर दरबार स ेचला गया। परत ुसभी तनेाल राम के बुधमतापूण याय क भूर -भूर शंसा कर रहे थे। 
अपराधी। तेनाली राम की कहानियाँ । Reviewed by Admin on जनवरी 11, 2016 Rating: 5

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