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मकर संक्रांति का महत्त्व (१४/१५ जनवरी मकर संक्रांति (पुण्यकाल : १५ जनवरी सूर्योदय से सूर्यास्त))।

मकर संक्रांति का महत्त्व
(१४/१५ जनवरी मकर संक्रांति (पुण्यकाल : १५ जनवरी सूर्योदय से सूर्यास्त))
* संत श्री आसारामजी बापू के सत्संग-प्रवचन से *
मकर संक्रांति या उत्तरायण दान-पुण्य का पर्व है । इस दिन किया गया
दान-पुण्य, जप-तप अनंतगुना फल देता है । इस दिन कोई रुपया-पैसा दान करता
है, कोई तिल-गुड दान करता है । मैं तो चाहता हूँ कि आप अपने को ही भगवान
के चरणों में दान कर डालो । उससे प्रार्थना करो कि 'हे प्रभु ! तुम मेरा
जीवत्व ले लो... तुम मेरा अहं ले लो... मेरा जो कुछ है वह सब तुम ले
लो... तुम मुझे भी ले लो... ।
जिसको आज तक 'मैं और 'मेरा मानते थे वह ईश्वर को अर्पित कर दोगे तो बचेगा
क्या ? ईश्वर ही तो बच जायेंगे...
(ऋषि प्रसाद : जनवरी २००३)
उत्तरायण महापर्व
उत्तरायण के दिन भगवान सूर्यनारायण के
इन नामों का जप विशेष हितकारी है ।
ॐ मित्राय नमः । ॐ रवये नमः ।
ॐ सूर्याय नमः । ॐ भानवे नमः ।
ॐ खगाय नमः । ॐ पूष्णे नमः ।
ॐ हिरण्यगर्भाय नमः । ॐ मरीचये नमः ।
ॐ आदिूत्याय नमः । ॐ सवित्रे नमः ।
ॐ अर्काय नमः । ॐ भास्कराय नमः ।
ॐ सवितृ सूर्यनारायणाय नमः ।
उत्तरायण देवताओं का प्रभातकाल है । इस दिन तिल के उबटन व तिलमिश्रित जल
से स्नान, तिलमिश्रित जल का पान, तिल का हवन, तिल का भोजन तथा तिल का
दान- सभी पापनाशक प्रयोग हैं ।
नमस्ते देवदेवेश सहस्रकिरणोज्ज्वल । लोकदीप नमस्तेऽस्तु नमस्ते कोणवल्लभ ।।
भास्कराय नमो नित्यं खखोल्काय नमो नमः । विष्णवे कालचक्राय सोमायामिततेजसे ।।
'हे देवदेवेश ! आप सहस्र किरणों से प्रकाशमान हैं । हे कोणवल्लभ ! आप संसार के
लिए दीपक हैं, आपको हमारा नमस्कार है । विष्णु, कालचक्र, अमित तेजस्वी,
सोम आदि नामों से सुशोभित एवं अंतरिक्ष में स्थित होकर सम्पूर्ण विश्व को
प्रकाशित करनेवाले आप भगवान भास्कर को हमारा नमस्कार है ।
(भविष्य पुराण, ब्राह्म पर्व : १५३.५०-५१)
उत्तरायण का पर्व प्राकृतिक ढंग से भी बडा महत्त्वपूर्ण है । इस दिन लोग
नदी में, तालाब में, तीर्थ में स्नान करते हैं लेकिन शिवजी कहते हैं जो
भगवद्-भजन, ध्यान और सुमिरन करता है उसको और तीर्थों में जाने का कोई
आग्रह नहीं रखना चाहिए, उसका तो हृदय ही तीर्थमय हो जाता है । उत्तरायण
के दिन सूर्यनारायण का ध्यान-चिंतन करके, भगवान के चिंतन में मशगूल
होते-होते आत्मतीर्थ में स्नान करना चाहिए । ॐ... ॐ... ॐ...
ब्रह्मचर्य से बहुत बुद्धिबल बढता है । जिनको
ब्रह्मचर्य रखना हो, संयमी जीवन जीना हो, वे
उत्तरायण के दिन भगवान सूर्यनारायण का
सुमिरन करें, जिससे बुद्धि में बल बढे ।
ॐ सूर्याय नमः... ॐ शंकराय नमः...
ॐ गं गणपतये नमः... ॐ हनुमते नमः...
ॐ भीष्माय नमः... ॐ अर्यमायै नमः...
ॐ... ॐ... ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ
मकर संक्रांति का महत्त्व (१४/१५ जनवरी मकर संक्रांति (पुण्यकाल : १५ जनवरी सूर्योदय से सूर्यास्त))। Reviewed by Admin on जनवरी 15, 2016 Rating: 5

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