व्यापारी लाभ के साथ वास्तविक लाभ पाने का दिन : लाभपंचमी।

व्यापारी लाभ के साथ वास्तविक लाभ पाने का दिन : लाभपंचमी। कार्तिक शुक्ल पंचमी ‘लाभपंचमी कहलाती है । इसे ‘सौभाग्य पंचमी भी कहते हैं । जैन लोग इसको ‘ज्ञान पंचमी कहते हैं । व्यापारी लोग अपने धंधे का मुहूर्त आदि लाभपंचमी को ही करते हैं । लाभपंचमी के दिन धर्मसम्मत जो भी धंधा शुरू किया जाता है उसमें बहुत-बहुत बरकत आती है । यह सब तो ठीक है लेकिन संतों-महापुरुषों के मार्गदर्शन-अनुसार चलने का निश्चय करके भगवद्भक्ति के प्रभाव से काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार इन पाँचों विकारों के प्रभाव को खत्म करने का दिन है लाभपंचमी । महापुरुष कहते हैं : दुनिया से ऐ मानव ! रिश्त-ए-उल्फत (प्रीति) को तोड दे । जिसका है तू सनातन सपूत, उसीसे नाता जोड दे ।। ‘मैं भगवान का हूँ, भगवान मेरे हैं - इस प्रकार थोडा भगवद्qचतन, भगवत्प्रार्थना,भगवद्स्तुति करके संसारी आकर्षणों से, विकारों से अपने को बचाने का संकल्प करो । पाँच काम करने में कभी देर नहीं करनी चाहिए : १. धर्म का कार्य करने में कभी देर मत करना । २. सत्पात्र मिल जाय तो दान-पुण्य करने में देर नहीं करना । ३. सच्चे संत के सत्संग, सेवा आदि में देर मत करना । ४. सत्शास्त्रों का पठन, मनन, चितन तथा उसके अनुरूप आचरण करने में देर मत करना । ५. भय हो तो भय को मिटाने में देर मत करना । निर्भय नारायण का चितन करना और भय जिस कारण से होता है उस कारण को हटाना । यदि शत्रु सामने आ गया है, मृत्यु का भय है अथवा शत्रु जानलेवा कुछ करता है तो उससे बचने में अथवा उस पर वार करने में भय न करना । यह ‘स्कंद पुराण में लिखा है । तो विकार, चिन्ता, पाप-विचार ये सब भी शत्रु हैं, इनको किनारे लगाने में देर नहीं करनी चाहिए । बुद्धि में पाँच बडे भारी सद् गुण हैं, उनको समझकर उनसे लाभ उठाना चाहिए । १. अशुभ वृत्तियों का नाश करने की, शुभ की रक्षा करने की ताकत बुद्धि में है । २. चित्त को एकाग्र करने की शक्ति बुद्धि में है । श्वासोच्छ्वास की गिनती से, गुरुमूर्ति, ॐ कार अथवा स्वस्तिक पर त्राटक करने से चित्त एकाग्र होता है और भगवान का रस भी आता है । ३. उत्साहपूर्वक कोई भी कार्य किया जाता है तो सफलता जरूर मिलती है । ४. अमुक कार्य करना है कि नहीं करना है, सत्य-असत्य, अच्छा-बुरा, हितकर-अहितकर इसका बुद्धि ही निर्णय करेगी, इसलिए बुद्धि को स्वच्छ रखना । ५. निश्चय करने की शक्ति भी बुद्धि में है । इसलिए बुद्धि को जितना पुष्ट बनायेंगे, उतना हर क्षेत्र में आप उन्नत हो जायेंगे । तो बुद्धिप्रदाता भगवान सूर्यनारायण को प्रतिदिन अघ्र्य देना और उन्हें प्रार्थना करना कि ‘मेरी बुद्धि में आपका निवास हो, आपका प्रकाश हो । इस प्रकार करने से तुम्हारी बुद्धि में भगवद्सत्ता, भगवद्ज्ञान का प्रवेश हो जायेगा।

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