मन गुरुदेव के श्री चरणों में स्थिरता से सदा के लिए कैसे आकर्षित हो ?

संत श्री आशारामजी बापू से प्रश्न : मन गुरुदेव के श्री चरणों में स्थिरता से सदा के लिए कैसे आकर्षित हो ? उत्तर :गुरुदेव के प्रति आकर्षण कहो कि भगवान के प्रति आकर्षण कहो कि स्व के प्रति आकर्षण कहो, एक ही तत्व के ये अनेक नाम हैं | आपका मन स्व के तरफ आकर्षित हो जाये, मैं तो ये भाषा ही अच्छी कहता हूँ | खामख्वाह मेरे को बदनाम मत करो कि गुरुदेव के चरणों में, गुरुदेव के चरणों में | अब आना तो है स्व सुख में और नाम पड़ता है कि गुरुदेव के चरणों में, अब बापू के चरणों में जायेगा | हमारा क्या होगा ? ये तो मुझे बदनामी करने वाला नाम है | आप स्व के चरणों में आकर्षित हो जाओ | अब स्व को देखा नहीं उसको खोजने लग जाओ | 'गुरुदेव के चरणों में आकर्षित होने के लिए' ऐसे शब्द के लिए हम सहमति नहीं देते | भगवान के चरण बोल दो क्योंकि मेरे चरण का नाम लोगे तो खतरा पैदा हो जायेगा मेरे लिए | भगवान के चरण कह दो, स्व के चरण कह दो | आप स्व चरण में आकर्षित हो जाओ, भगवत चरण में आकर्षित हो जाओ और जहाँ आपके स्व चरण हैं, भगवत चरण हैं, वहीं मेरे चरण हैं | मैं क्यों झंझट मोल लूँ, क्यों किसी का नाहक समय खराब करूं ?

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