LATEST NEWS

recent

हिन्दू धर्म (सनातन धर्म) की क्या महिमा है?

हिन्दू धर्म की महिमा।
                         भारत का सर्वप्रमुख धर्म हिन्दू धर्म है, जिसे इसकी प्राचीनता एवं विशालता के कारण ‘सनातन धर्म’ भी कहा जाता है। ईसाई, इस्लाम, बौद्ध, जैन आदि धर्मों के समान हिन्दू धर्म किसी पैगम्बर या व्यक्ति विशेष द्वारा स्थापित धर्म नहीं है, बल्कि यह प्राचीन काल से चले आ रहे विभिन्न धर्मों, मतमतांतरों, आस्थाओं एवं विश्वासों का समुच्चय है।यह हिन्दू-धर्म का सौभाग्य अथवा दुर्भाग्य है कि वह कोई सत्तारोपित मत नहीं है। अतः अपने आपको किसी गलतफहमी से बचाने के लिए ही मैंने कहा है कि सत्य और अहिंसा मेरा धर्म है। यदि मुझसे हिन्दू-धर्म की व्याख्या करने के लिए कहा जाये तो मैं इतना ही कहूंगा-अहिंसात्मक साधनों द्वारा सत्य की खोज। कोई मनुष्य ईश्वर में विश्वास न करते हुए भी अपने-आपको हिन्दू कह सकता है। सत्य की अथक खोज का ही दूसरा नाम हिन्दू-धर्म है। यदि आज वह मृतप्राय, निष्क्रिय अथवा विकासशील नहीं रह गया है तो इसलिए कि हम थककर बैठ गये हैं और ज्यों ही थकावट दूर हो जायेगी त्यों ही हिन्दू-धर्म संसार पर ऐसे प्रखर तेज के साथ छा जायेगा जैसा कदाचित् पहले कभी नहीं हुआ। अतः निश्चित रूप से हिन्दू-धर्म सबसे अधिक सहिष्णु धर्म है। निम्नलिखित विश्वप्रसिद्ध विद्वानों के वचन सनातन धर्म की महत्ता प्रतिपादित करते हैं और ʹसर्व धर्म समानʹ कहने वाले लोगों के मुँह पर करारा तमाचा लगाते हैं- “मैंन यूरोप और एशिया के सभी धर्मों का अध्ययन किया है परंतु मुझे उन सबमें हिन्दू धर्म ही सर्वश्रेष्ठ दिखायी देता है। मेरा विश्वास है कि इसके सामने एक दिन समस्त जगत को सिर झुकाना पड़ेगा। मानव-जाति के अस्तित्व के प्रारम्भ के दिनों से लेकर अब तक पृथ्वी पर जहाँ जिंदे मनुष्यों के सब स्वप्न साकार हुए हैं, वह एकमात्र स्थान है – भारत।” रोमा रोलां (फ्रेंच विद्वान) मैंने 40 वर्षों तक विश्व के सभी बड़े धर्मों का अध्ययन करके पाया कि हिन्दू धर्म के समान पूर्ण, महान और वैज्ञानिक धर्म कोई नहीं है।
                      डॉ. एनी बेसेंट (ब्रिटिश लेखिका, थियोसॉफिस्ट, समाजसेविका) मैं ईसाई धर्म को एक अभिशाप मानता हूँ। इसमें आंतरिक विकृति की पराकाष्ठा है। वह द्वेषभाव से भरपूर वृत्ति है। इस भयंकर विष का कोई मारण नहीं। फिलास्फर नित्शे (जर्मन दार्शनिक) जीवन को ऊँचा उठाने वाला उपनिषदों के समान दूसरा कोई अध्ययन का विषय सम्पूर्ण विश्व में नहीं है। इनसे मेरे जीवन को शांति मिली है, इन्हीं से मुझे मृत्यु के समय भी शांति मिलेगी।” शॉपनहार (जर्मन दार्शनिक) प्राचीन युग की सभी स्मरणीय वस्तुओं में भगवदगीता से श्रेष्ठ कोई भी वस्तु नहीं है। गीता के साथ तुलना करने पर जगत का समस्त आधुनिक ज्ञान मुझे तुच्छ लगता है। मैं नित्य प्रातःकाल अपने हृदय और बुद्धि को गीतारूपी पवित्र जल में स्नान कराता हूँ। हेनरी डेविड थोरो (अमेरिकन लेखक व दार्शनिक) धर्म के क्षेत्र में सब राष्ट दरिद्र हैं लेकिन भारत इस क्षेत्र में अरबोंपति है। -मार्क टवेन (अमेरिकन विद्वान) विश्व के किसी भी धर्म ने इतनी वाहियात, अवैज्ञानिक, आपस में विरोधी और अनैतिक बातों का उपदेश नहीं दिया, जितना चर्च ने दिया है।- टॉलस्टॉय (रूसी नैतिक विचारक) गीता का उपदेश इतना अलौकिक, दिव्य और ऐसा विलक्षण है कि जीवन-पथ पर चलते-चलते अऩेक निराश एवं श्रांत पथिकों को इसने शांति, आशा व आश्वासन दिया है और उऩ्हें सदा के लिए चूर-चूर होकर मिट जाने से बचा लिया है। ठीक उसी प्रकार जैसे इसने अर्जुन को बचाया। - के ब्राउनिंग बाईबिल पुराने और दकियानूसी अंधविश्वासों का एक बंडल है। - जार्ज बर्नाड शा (सुप्रसिद्ध आइरिश विद्वान) भारत में पादरियों का धर्म-प्रचार हिन्दू धर्म को मिटाने का खुला षडयंत्र है, जो कि एक लम्बे अरसे से चला आ रहा है।
                             हिन्दुओं का तो यह धार्मिक कर्तव्य है कि वे ईसाइयों के षडयंत्र से आत्मरक्षा में अपना तन-मन-धन लगा दें और आज जो हिन्दुओं को लपेटती हुई ईसाइयत की लपट परोक्ष रूप से उनकी ओर बढ़ रही है, उसे यहीं पर बुझा दें। ऐसा करने से ही भारत में धर्म-निरपेक्षता, धार्मिक बंधुत्व तथा सच्चे लोकतंत्र की रक्षा हो सकेगी अन्यथा आजादी को पुनः खतरे की सम्भावना हो सकती है। - पं. श्रीराम शर्मा। हमें गोमांस-भक्षण और शराब पीने की छूट देने वाला ईसाई धर्म नहीं चाहिए। धर्म परिवर्तन वह जहर है, जो सत्य और व्यक्ति की जड़ों को खोखला कर देता है। मिशनरियों के प्रभाव से हिन्दू परिवार का विदेशी भाषा, वेशभूषा, रीति-रिवाज के द्वारा विघटन हुआ है। यदि मुझे कानून बनाने का अधिकार होता तो मैं धर्म-परिवर्तन बंद करवा देता। इसे तो मिशनरियों ने एक व्यापार बना लिया है, पर धर्म आत्मा की उन्नति का विषय है। इसे रोटी, कपड़ा या दवाई के बदले में बेचा या बदला नहीं जा सकता। - महात्मा गांधी हिन्दू समाज में से एक मुस्लिम या ईसाई बने, इसका मतलब यह नहीं कि एक हिन्दू कम हुआ बल्कि हिन्दू समाज का एक दुश्मन और बढ़ा। - स्वामी विवेकानंद तटस्थ एवं निष्पक्ष विद्वानों व विचराकों द्वारा सनातन धर्म एवं अन्य धर्मों के विषय में प्रकट किये गयेच इऩ विचारों के अध्ययन के पश्चात आशा है कि सनातन धर्मावलम्बी स्वयं को हिन्दू कहलाने में गर्व का अनुभव करेंगे। सबके प्रति स्नेह व सदभाव रखना भारतवर्ष की विशेषता है लेकिन ʹसर्व धर्म समानʹ का भाषण देने वाले लोग भोले-भाले भारतवासियों के दिलोदिमाग में मैकाले की कूटनीतिक शिक्षा नीति और पाश्चात्य गुलामी के संस्कार भरते हैं। जैसे-चपरासी, सचिव, जिलाधीश आदि सब अधिकारी समान नहीं होते, गंगा, यमुना, गोदावरी आदि नदियों का जल और कुएँ, बावली नाली का जल समान नहीं होता, ऐसे ही सब धर्म समान नहीं होते। (सर्व धर्म समान ? पुस्तक से क्रमशः) स्रोतः ऋषि प्रसाद, जून 2013, पृष्ठ संख्या 13,15 अंक 246 ૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐૐ
                  धर्म ( हिन्दू ) कई युगो पुराना है धर्म पालकों ( हिन्दुओ ) को छोड़कर दुनिया के सभी उपधर्म संप्रदाय या जातियाँ क्रम विकास से जन्मती है और नष्ट हो जाती हैं परंतु धर्म पालक (हिन्दु) कभी नही समाप्त होते , हिन्दुओ के धार्मिक ग्रंथो मे कल्पो का विवरण दिया हुआ है । हिन्दू धर्म के अनुसार चारों युगों का 1 चक्र 1000 बार पूरा होना एक कल्प होता है । हिन्दू धर्म मे चार युगों की गढ़ना की गई है सतयुग, त्रेता, द्वापर, कलियुग जो लगभग १२०००००० वर्ष या एक कल्प कहलाता है यह है हमारे ज्ञान-विज्ञान की प्राचीनता।

हिन्दू धर्म (सनातन धर्म) की क्या महिमा है? Reviewed by Admin on सितंबर 08, 2014 Rating: 5

कोई टिप्पणी नहीं:

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

anandkrish16 के थीम चित्र. Blogger द्वारा संचालित.