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हिन्दु हैं, हिन्दी हैं, हिन्दुस्थानी हैं।

हिन्दु हैं, हिन्दी हैं, हिन्दुस्थानी हैं। योग भक्ति की खोज है ये इश्वरीय ज्ञान है जो हमारे पूर्वजों की हजारों वर्षों की मेहनत का फ़ल है। महाॠषि पतन्जलि,पाणीनि और श्री कृष्ण इसके जन्मदाता हैं। योग और आयुर्वेद एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। आज पूरे संसार में अनेक चिकित्सा प्रणालियाँ विद्यमान हैं लेकिन कोई भी प्रणाली ये प्रावधान नहीं करती की आदमी बिमार ही न हो। सब की सब बिमार होने पर इलाज या रोकथाम का प्रबन्ध करती हैं परन्तु केवल मात्र योग ही ऐसा साधन है जो आपको बिमार न होने का प्रबन्ध करता है जो व्यक्ति लगातार योग करता है वह कभी बिमार ही नहीं होता है। हमारे पूर्वजों ने हमें ऐसी विद्या भेंट के रुप में दी है जो किसी दूसरे के पास नहीं है। योग का नित्य अभ्यास हमें निरोग बनाता है और अध्यात्मिक शक्ति के साथ हमें स्वस्थ रखता है। हम सब ये तो जानते हैं कि जो शाकाहारी भोजन हम खाते हैं वो हमें कहाँ से मिलता है? उत्तर आता है कि पौधों से, तब अगर पेड़-पौधों से ही हमारी चिकित्सा हो जाए तो, आप कहेंगे कि अति उत्तम होगा। क्योंकि जो वस्तु हमें पहले ही भाती हो तो वो हमें साईड प्रभाव नहीं करेगी। ऐसा इलाज करता है, हमारा आयुर्वेद। हमें अपने धर्म,संस्कृति पर गर्व करना चाहिये। आज हमें शुद्धिकरण कीआवश्यकता आन पड़ी है। आज हमें अपने आप को पहचानने की जरुरत है। ऐसे महान धर्म को जो लोग त्याग कर जा रहे हैं उन्हें चाहिये कि वो उन लोगों को सबक सिखाएँ, जो इस धर्म को तोड़ने की साजिश में लगातार लगे हुए हैं। हमें इन्डियन बनाया जा रहा है ताकि हम अपनी संस्कृति और धर्म से ज्यादा से ज्यादा दूरी बना सकें। हमें आज शुद्ध अर्थों में भारतीय बनना है। गर्व के साथ कहना है - हिन्दु हैं, हिन्दी हैं, हिन्दुस्थानी हैं।
हिन्दु हैं, हिन्दी हैं, हिन्दुस्थानी हैं। Reviewed by Admin on सितंबर 04, 2014 Rating: 5

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