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एक ब्राह्मणी का अपने पतिव्रता धर्म के प्रति सम्मान।

एक ब्राह्मणी का अपने पतिव्रता धर्म के प्रति सम्मान। एक बार एक ब्राह्मण के घर की एक स्त्री स्नान कर रही थी, तभी संयोग से वहाँ से एक राजा की सवारी निकल रही थी। हाथी पर बैठे राजा को अकस्मात स्त्री का चेहरा व गर्दन तक तन दिखा, व ब्राह्मण स्त्री से राजा की निगाहेँ भी टकरा गयी, तब तुरंत राजा हाथी से उतर गए और पैदल चलने लगे, राजा के एक सुरक्षा-कर्मी ने राजा से पैदल चलने का कारण पूछा !! तब राजा ने कहा: हाथी पर बैठने के कारण मैंने अनजाने में एक ब्राह्मण स्त्री की हत्या कर दी इसलिए मैं अब से भविष्य में कभी हाथी की सवारी नहीं करूंगा" और वास्तव में अगली सुबह खबर मिली की उक्त ब्राहाण घर की स्त्री ने अत्महत्या कर अपने प्राण त्याग दिये..... मेरे भाइयों बहनों ऐसा रहा हैं ब्राह्मणो की मर्यादित और गरिमामय जीवन और ऐसी होती थी अपने धर्म के प्रति निष्ठा और आत्मसम्मान। अतः मेरा आप से निवेदन हैं कि पुरखों की संजोयी की हुई महानता को याद रखे, भले आज के समय में आधुनिक बने पर अपने धर्म के सिद्धांतों का पालन करेँ।
एक ब्राह्मणी का अपने पतिव्रता धर्म के प्रति सम्मान। Reviewed by Admin on सितंबर 29, 2014 Rating: 5

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